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    BrahMos in focus: फिलीपींस ने निकाली ब्रह्मोस, छटपटा उठा चीन

    3 hours from now

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    दक्षिण चीन सागर में चाइना की दादागिरी को करारा जवाब मिलने वाला क्योंकि भारत से ब्रह्मोस मिसाइल मिलने के बाद अब फिलीपींस अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहा है। दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस अब फिलीपींस और अमेरिका के बीच होने वाले सबसे बड़े सैन्य अभ्यास बालीट्टन में अपना दम दिखाएगी। दरअसल फिलीपींस पहली बार इस मिसाइल का सिमुलेशन फायरिंग करने जा रहा है। जो कि बड़े सैन्य अभ्यास बालिका के दौरान होगा। यह असली फायरिंग नहीं होगी लेकिन पूरी तैयारी वैसी ही रहेगी। रडार ऑन, टारगेट लॉक, लॉन्च सिस्टम एक्टिव सब कुछ असली युद्ध जैसे माहौल में। दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति है। द्वीपों और समुद्री इलाकों को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है और चीन की आक्रामक रणनीति को फिलीपींस अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। यही वजह है कि फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी ताकि चीन को साफ संदेश दिया जा सके कि अब जवाब देने की ताकत उसके पास भी है। इसे भी पढ़ें: Pakistan दागने जा रहा मिसाइल, भारत ने उतारा खूंखार INS ध्रुव, घेरा इलाकाअप्रैल 2024 में इसकी पहली बैटरी डिलीवर की गई जिसमें कई लांचर, ट्रैकिंग सिस्टम और सपोर्ट व्हीकल शामिल होते हैं। और आपको बता दें ब्रह्मोस की ताकत ही इसे खास बनाती। करीब 2.8 मैक की रफ्तार यानी लगभग 3400 कि.मी. प्रति घंटा इतनी तेज की दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। जमीन, समुद्र, हवा कहीं से भी लॉन्च होने की क्षमता ब्रह्मोस को और घातक बनाती है। 200 से 300 किलो तक का बोरहेड ले जाने वाली ये मिसाइल सीधे दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है। फिलीपींस के लिए यह सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि एक डिटरेंसी यानी दुश्मन को पहले ही रोकने की ताकत। खासतौर पर समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और एंटी एक्सेस ऑपरेशन में यह गेम चेंजर मानी जा रही है। और फिलीपींस के पास जब से ब्रह्मोस आई थी। चीन की बौखलाहट भी देखने को मिली। 2024 में जब भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस दी थी, उस वक्त भी चीन काफी बौखलाया था। और अब बेलीटन अभ्यास में पहली बार ब्रह्मोस का सिमुलेशन फायरिंग फिलीपींस करने जा रहा है। इसलिए चीन और बौखलाएगा। इसे भी पढ़ें: उधर बुरा भिड़े अमेरिका-ईरान, इधर मलक्का में खेल गया भारत!बड़ी बात यह है कि इसमें अमेरिका भी शामिल रहे और इस दौरान कई एडवांस सिस्टम भी शामिल किए जा रहे हैं। मकसद साफ है सभी सिस्टम को एक साथ जोड़कर ज्यादा ताकतवर सैन्य क्षमता तैयार करना। हालांकि आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि यह अभ्यास किसी एक देश के खिलाफ नहीं है। लेकिन जमीन की सच्चाई यही है कि पूरा फोकस इंडोपेसिफिक में बढ़ते तनाव पर है। जहां चीन की मौजूदगी लगातार चुनौती बन रही है। कुल मिलाकर ब्रह्मोस की एंट्री ने पूरे इलाके का रणनीतिक समीकरण बदल दिया है। भारत की यह मिसाइल अब सिर्फ देश की ताकत नहीं रही बल्कि चीन के खिलाफ खड़े देशों के लिए एक मजबूत ढाल बनती जा रही है। 
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