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    बर्खास्त सिपाही ने बुजुर्ग को जिंदा जलाया:हाथरस में खुद को मृत घोषित करने के लिए रची साजिश; हत्या के मामले में फरार चल रहा था

    11 hours ago

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    हाथरस में जेल जाने से बचने के लिए हत्यारोपी बर्खास्त सिपाही ने अपनी मौत की झूठी कहानी रच दी। अपना आधार कार्ड, मोबाइल सहित अन्य डॉक्यूमेंट एक व्यक्ति की जेब में रखकर उसे जिंदा जला कर मार डाला। हालांकि, जिंदा जलाते वक्त आरोपी सिपाही भी बुरी तरह झुलस गया। दो दिन तक चोरी-छिपे हाथरस जिला अस्पताल में अपना इलाज कराता रहा लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उधर, लाश मिलने और अधजले आधार कार्ड को देखते हुए पहले तो पुलिस ने सिपाही को मृत मान लिया। लेकिन रेलवे स्टेशन पर दिखने वाले एक भिखारी के अचानक गायब होने पर शक हुआ। पुलिस ने सिपाही के गांव में पता लगाया। इसी दौरान जिला अस्पताल में सिपाही के नाम के गंभीर रूप से झुलसे हुए व्यक्ति के भर्ती होने की सूचना मिली। इस पर पुलिस अलर्ट हुई। जांच-पड़ताल की तो पता चला कि सिपाही जिंदा है और मरने वाला रेलवे स्टेशन के आसपास एरिया में दिखने वाला भिखारी है। पुलिस के अनुसार, सिपाही ने 12 मार्च को वारदात को अंजाम दिया था। उसकी साजिश के बारे में पता चलने के बाद पुलिस उसके ठीक होने का इंतजार कर रही थी। सैफई मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद उसे बुधवार को अरेस्ट किया गया। आरोपी सिपाही की पहचान मैनपुरी के बघौनी गांव के रामवीर सिंह (55) के रूप में हुई है। उसे 2013 में यूपी पुलिस से बर्खास्त किया गया था। उस पर ड्यूटी के दौरान हत्या समेत 13 मुकदमे दर्ज थे। अब जानिए पूरा मामला... जीआरपी प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- रामवीर सिंह यूपी पुलिस का सिपाही था लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से उसे बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद वह फरार चल रहा था। पुलिस को उसकी तलाश थी। गिरफ्तारी और जेल से बचने के लिए उसने साजिश रची। वह एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़ रहा था जिसका कोई जानने वाला न हो। हाथरस प्लेटफार्म पर उसने अपनी ही कदकाठी के एक भिखारी को देखा। भिखारी को देखने के बाद उसने खतरनाक प्लान बनाया। दरअसल, 12 मार्च को हाथरस प्लेटफार्म जब रात में सुनसान हो गया तो उसने अपने प्लान को अंजाम देते हुए सो रहे भिखारी पर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जला दिया। पुलिस को गुमराह करने के लिए अपना अधजला आधार कार्ड, जला हुआ मोबाइल वहीं छोड़ दिया। हालांकि, भिखारी को जिंदा जलाते वक्त बर्खास्त सिपाही भी बुरी तरह झुलस गया। दो दिन तक सिपाही इधर-उधर मेडिकल स्टोर्स से खरीदकर दवा खाता रहा लेकिन जब जलन बर्दाश्त से बाहर हो गई तो हाथरस जिला अस्पताल में भर्ती हो गया। लेकिन उसकी हालत को देखते हुए 14 मार्च को ही डॉक्टर्स ने उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। प्लेटफार्म के भिखारी के गायब होने पर पुलिस को हुआ शक उधर, पुलिस हाथरस प्लेटफार्म के पास मिली लावारिस जली हुई लाश को रामवीर सिंह मानकर आगे की कार्रवाई करने लगी। हालांकि, उसी दौरान जीआरपी पुलिस को उस समय शक हुआ जब प्लेटफार्म पर दिखने वाला एक भिखारी भी लापता हो गया। स्थानीय लोगों की मानें तो वह भिखारी अमूमन प्लेटफार्म छोड़कर कहीं जाता नहीं था। इस बात का पता लगते ही पुलिस का शक गहरा गया। पुलिसवाले संदेह पर जांच शुरू कर दिए। मैनपुरी में रामवीर सिंह के गांव में संपर्क किया। इसी बीच जीआरपी थानेदार सुयश सिंह को यह जानकारी मिली कि जिला अस्पताल में रामवीर सिंह नामक एक व्यक्ति जली हालत में आया था और उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। बर्खास्त सिपाही के गांव में खुला राज, अरेस्ट के लिए एक महीने इंतजार पुलिस ने बर्खास्त सिपाही के गांव में भी पता लगाया तो बात पता चली कि मेडिकल कॉलेज में परिवार का कोई भर्ती है, उसी की तीमारदारी में परिजन लगे हुए हैं। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया तो स्पष्ट हो गया कि बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह जीवित है और मेडिकल कॉलेज में झुलसने की वजह से भर्ती है। पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हो गया कि प्लेटफार्म पर मिली लाश, भिखारी की है। इसके बाद उसका पुलिसवालों ने अंतिम संस्कार करा दिया। उधर, सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती बर्खास्त सिपाही पर पुलिसवाले चुपचाप नजर रखे हुए थे। एक महीना बाद जब उसे मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज किया गया तो उसे अरेस्ट कर हाथरस लाया गया। जीआरपी इंस्पेक्टर सुयश सिंह ने बताया- पूछताछ में आरोपी बर्खास्त सिपाही ने अपना जुर्म कबूल लिया है। वह भिखारी को जलाकर खुद को मृतक घोषित कराना चाहता था। अगर पुलिस उसकी कहानी सच मान ली होती तो वह आरोप से कहीं और जाकर बस जाता और गिरफ्तारी से बच जाता। इन तीन वजहों से पकड़ा गया 1- जीआरपी को गांव में यह बात पता चल गई कि रामवीर मरा नहीं है। उसके परिवार वाले सैफई मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं। 2- रेलवे स्टेशन पर ही भिखारी रहता था। वह कहीं जाता नहीं था। वह भी लापता था। इसलिए पुलिस का शक और बढ़ गया। 3- बर्खास्त सिपाही ने हाथरस जिला अस्पताल और सैफई मेडिकल कॉलेज में अपना असली नाम और पते से पेशेंट पर्चा बनवाया था। इस वजह से भी पुलिस को आसानी हुई। फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद, हरदोई, मैनपुरी और बंदायूं में वॉन्टेड जीआरपी ने बताया- रामवीर सिंह के खिलाफ 2012 से 2013 के बीच फिरोजाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, मैनपुरी, बदायूं और कानपुर देहात में कुल 13 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 2012 में बदायूं के सिविल लाइंस थाने में हत्या और 2013 में फिरोजाबाद के मटसैना थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा पंजीकृत है। 2013 में मटसैना थाने से गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जा चुका है। वह फरार चल रहा था। इकलौते बेटे की मौत, 5 बेटियां मां के साथ रह रहीं पुलिस ने बताया- रामवीर सिंह का परिवार मैनपुरी में ही रहता है। उसके कुल 6 बच्चे थे, जिनमें से इकलौते बेटे की मौत हो चुकी है। परिवार में 5 बेटियां बची हैं जो अपनी मां के साथ रहती हैं। ----------------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… संभल में ईदगाह-इमामबाड़ा को बुलडोजर चल रहा:भीड़ को अफसरों ने हटाया, 5 थानों की फोर्स और PAC तैनात संभल में ईदगाह और इमामबाड़े पर गुरुवार सुबह 8 बजे से बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। इमामबाड़ा गिरा दिया गया है। अब ईदगाह को चार बुलडोजरों से तोड़ा जा रहा है। मौके पर 5 थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी PAC तैनात की गई है। इसी बीच, गांव के लोग मौके पर जुट गए। विरोध की आशंका को देखते हुए अफसरों ने उन्हें वहां से हटा दिया। प्रशासन के मुताबिक, करीब 7 बीघा चारागाह की जमीन पर ईदगाह और खाद गड्ढे की भूमि पर इमामबाड़ा बनाया गया था। पूरी खबर पढ़िए…
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