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    बरेली का बांके बिहारी मंदिर सफेद संगमरमर से दमक रहा:जन्माष्टमी पर रात 12 बजे होगा महाभिषेक, 15 दिनों तक चलेगा राधाष्टमी का महापर्व

    1 hour ago

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    बरेली के राजेंद्रनगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। बाहर से सफेद संगमरमर और आकर्षक गुंबदों से सजा मंदिर दूधिया लाइटों से नहाया हुआ है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह को कोलकाता के सुगंधित फूलों से सजाया गया है। सजावट के लिए मथुरा और दिल्ली से खास कारीगर बुलाए गए हैं। भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए लोग घंटों से कतार में लगे हैं। रात ठीक 12 बजे मंदिर में शंखनाद और घंटों की गूंज होगी। 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयघोष के बीच कान्हा का पंचामृत से महाभिषेक होगा। इसके बाद महाआरती होगी और भक्तों में 56 भोग-पंजीरी का महाप्रसाद बंटेगा। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, यह धार्मिक उत्सव आज ही सीमित नहीं रहेगा। राधाष्टमी तक यानी अगले 15 दिनों तक रोज विशेष भजन, संकीर्तन और भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। देखे 3 तस्वीरें… जयपुर की नक्काशीदार मूर्तियां और आठ दिव्य दरबार मंदिर में जयपुर के मूर्तिकारों ने बांके बिहारी और राधा रानी की सुंदर प्रतिमाएं तैयार की हैं। मुख्य गर्भगृह के अलावा परिसर में शिवजी, राम दरबार और मां दुर्गा सहित सात अन्य दरबार भी स्थापित हैं। मंदिर का मुख्य सभागार पूरी तरह वातानुकूलित (AC) है, जिसमें 1200 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। फर्श पर भी सफेद संगमरमर लगा है। श्री बांके बिहारी मंदिर करीब 32 वर्ष पूर्व (लगभग 1994) बना था। पहले यहां राजेंद्रनगर में शील चौराहे के पास एक साधारण कम्युनिटी हॉल हुआ करता था, जिसमें एक छोटा सा देवस्थल था और मंदिर के पुजारी वहीं रहते थे। मंदिर का इतिहास: कम्युनिटी हॉल से भव्य देवालय तक का सफर कमेटी के पदाधिकारी दिनेश तनेजा जब दिल्ली स्थित अक्षरधाम मंदिर घूमने गए, तो वहां की भव्यता से बहुत प्रभावित हुए। बरेली लौटकर उन्होंने कमेटी के सामने भव्य मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा। सबकी सहमति मिलने के बाद पुराने कम्युनिटी हॉल को हटाकर नए देवालय का निर्माण शुरू हुआ। बाहरी हिस्से को सफेद संगमरमर और खूबसूरत गुंबदों का भव्य स्वरूप दिया गया। शिखर और बरामदे को तैयार होने में एक साल से ज्यादा का समय लगा। बाद में मंदिर के सामने वाले छज्जों और मेहराब पर बारीक गोल्डन काम कराया गया।
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