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    बिश्केक में पुतिन से मिले पीएम मोदी, रूस-यूक्रेन संघर्ष को बातचीत से सुलझाने पर दिया जोर

    4 hours ago

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    (फोटो के साथ) बिश्केक, 31 अगस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को रूस-यूक्रेन संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अपील करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि वह ‘‘अंतहीन युद्ध को समाप्त करने’’ की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान मानवता की साझा प्राथमिकता है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के मौके पर पुतिन के साथ बैठक में मोदी ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है।उन्होंने कहा कि गांधी और बुद्ध की धरती भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा व उर्वरक सुरक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में जारी सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा की। मोदी ने बैठक में टेलीविजन पर प्रसारित अपने शुरुआती संबोधन में कहा, हमने हमेशा यूक्रेन मुद्दे पर चर्चा की है।जब हमारी पिछली मुलाकात हुई थी, तब आपने मुझे इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, युद्ध काल का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम मानवता में नयी आशा और उत्साह भरता है।हमें अंतहीन युद्ध से... युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ना होगा, जो मानवता के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, सभी मुद्दों का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान मानवता की पुकार है और यही भारत का संदेश भी है। गांधी और बुद्ध की धरती का एक ही संदेश है- शांति का मार्ग।मोदी पुतिन की लिमोजिन कार से नोमैड गेम्स के आयोजन स्थल तक साथ गए। टेलीविजन फुटेज में दोनों नेताओं को खेलों के उद्घाटन समारोह के लिए संयुक्त रूप से प्रवेश करते हुए देखा गया। पिछले साल चीन के तियानजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेता एक ही कार से गए थे।पुतिन कुछ दिन बाद वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आएंगे, जिससे पहले दोनों के बीच यह मुलाकात हुई है। प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति की पिछले साल की नयी दिल्ली यात्रा का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा, पिछले साल आपकी भारत यात्रा बहुत सफल और वास्तव में यादगार रही।हमारे लिए यह गहरे संतोष की बात है कि हमारा सहयोग लगातार नयी ऊंचाइयों को छू रहा है और हम दोनों देशों के लोगों के कल्याण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना हमारा साझा दृष्टिकोण रहा है और भविष्य में भी यही हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत रहेगा। वहीं पुतिन ने कहा कि विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी के आधार पर रूस-भारत संबंधों में मजबूती आई है।विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार पर चर्चा हुई, जिसमें रूस में कई क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। विदेश सचिव ने यह भी कहा कि पिछली बैठक के बाद से रूस में भारतीय उत्पादों के लिए गैर-शुल्क बाधाओं और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मिसरी ने कहा कि मोदी और पुतिन ने यूक्रेन मुद्दे पर भी चर्चा की और प्रधानमंत्री ने इसे सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि मोदी ने अंतहीन युद्ध से... युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी ओर से संघर्ष को समाप्त करने के लिए हर संभव और जरूरी कदम उठाने को तैयार है, क्योंकि इसका वैश्विक समुदाय पर बहुत बड़ा असर पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और पुतिन ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, आवाजाही और लोगों के बीच संबंधों समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने 24 अगस्त को मॉस्को में हुई 27वीं भारत-रूस अंतर-सरकारी व्यापार, आर्थिक और सांस्कृतिक आयोग की बैठक के परिणामों का स्वागत किया। उसने कहा कि मोदी और पुतिन ने बहुपक्षीय मंचों, विशेष रूप से ब्रिक्स में भारत-रूस सहयोग पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों समेत आपसी हितों से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए।इन मुद्दों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने दोहराया कि संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। बयान में कहा गया है, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।यह साझेदारी लगातार बढ़ रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूती दिखा रही है। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करने की इच्छा जताई। मीडिया वार्ता में मिसरी ने रूसी सेना में सेवा दे रहे कई भारतीयों के मुद्दे पर भी जवाब दिया।उन्होंने कहा, रूसी सशस्त्र बलों में हमारे नागरिकों की भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच कई मौकों पर विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है। उन्होंने कहा, मॉस्को स्थित हमारा दूतावास इन भारतीय नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी के संबंध में लगातार नजर बनाए हुए है। जो मामले अभी बाकी हैं, उन्हें जल्द से जल्द समाप्त कराने के लिए हम रूसी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं।उन्होंने कहा, हमें पता चला है कि 227 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इनमें से 139 नागरिकों के सेना से मुक्त होने की जानकारी है। दुर्भाग्य से, हमें यह जानकारी भी मिली है कि अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है।उन्होंने कहा, यह ऐसा मुद्दा है जिस पर हम रूसी पक्ष के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं।
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