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    बुलंदशहर में मां अवंतिका देवी मंदिर का महाभारतकालीन इतिहास:श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह से जुड़ा है गंगा किनारे बसा ये मंदिर, जानिए विशेषता

    28 minutes ago

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    बुलंदशहर से करीब 45 किमी दूर गंगा किनारे ऊंची चोटी पर विराजमान मां अवंतिका देवी मंदिर महाभारत कालीन इतिहास समेटे हुए है। कहते हैं, मां गंगा चाहे जितना भी उफान लें, पर उनके भक्तों को मंदिर में कोई नुकसान नहीं पहुंचता। यही वह पवित्र स्थान है, जिसने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कहानी को अपनी आंखों से देखा। आज का आहार क्षेत्र महाभारत काल में कुंदनपुर कहलाता था। यहां के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी महज 4 साल की उम्र से ही मां अवंतिका देवी की पूजा करती थीं। रोज गंगा स्नान कर मंदिर पहुंचतीं और घंटों भजन गातीं। 'तेरा वर भगवान विष्णु का अवतार होगा' रुक्मिणी की भक्ति से प्रसन्न होकर मां अवंतिका देवी ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान दिया कि भगवान विष्णु का अवतार तुम्हारा वर होगा। वह किसी और से प्रेम करेंगे, लेकिन विवाह तुम्हारे साथ ही होगा। रत्नजड़ी कुंड की अद्भुत मान्यता राजा भीष्मक ने रुक्मिणी के स्नान के लिए रत्नजड़ी कुंड बनवाया। मान्यता है, मां गंगा हर दिन अपना रुख मोड़कर इस कुंड तक आती थीं। आज भी यहां गंगा जल मौजूद रहता है, चाहे नदी का जलस्तर कितना भी कम क्यों न हो। श्रद्धालुओं को मिलता है आशीर्वाद विश्वास है कि जो भी भक्त रत्नजड़ी कुंड के दर्शन कर मां अवंतिका देवी की पूजा करता है, उसे भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का आशीर्वाद मिलता है। आज के एपिसोड में हमने जाना कि किस प्रकार रुक्मणि, मां अवंतिका देवी और मां गंगा के बीच श्रद्धा भाव था। कल के एपिसोड में हम आपको राजा भीष्मक, उनके पुत्र रुक्न और भगवान श्रीकृष्ण के बीच हुए युद्ध के बारे में बताएंगे।
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