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    चंबल की निगरानी के लिए पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करना पड़ेगी:सुप्रीम कोर्ट ने MP-UP, राजस्थान सरकार को फटकार लगाई; अवैध खनन को लेकर दिखाई सख्ती

    7 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चंबल नदी में अवैध रेत खनन को लेकर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- अगर राज्य सरकारें अवैध खनन नहीं रोक पा रही हैं तो अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी। कोर्ट ने साफ कहा कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में जारी अवैध खनन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया, जिसमें खनन के जमीनी हालात उजागर किए गए थे। CCTV कैमरे और GPS से होगी सख्त निगरानी सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन के रास्तों और नदी के संवेदनशील इलाकों में हाई-रिजोल्यूशन CCTV कैमरे लगाए जाएं। साथ ही, खनन में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों और मशीनों में GPS डिवाइस अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। 24 घंटे संयुक्त गश्त, तुरंत जब्ती के आदेश कोर्ट ने पुलिस और वन विभाग को मिलकर 24 घंटे संयुक्त गश्त करने के निर्देश दिए हैं। अवैध खनन में लिप्त पाए जाने वाले वाहनों को तुरंत जब्त कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। इससे अवैध गतिविधियों पर तुरंत लगाम लगाने की कोशिश की जाएगी। ‘Polluter Pays’ सिद्धांत लागू करने का निर्देश कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया है कि वे अवैध खनन से हुए पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करें और ‘Polluter Pays Principle’ के तहत दोषियों से मुआवजा वसूलें। इसका उद्देश्य पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना है। अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अधिकारी लापरवाही करते पाए गए, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होगी और जवाबदेही से बचने का मौका नहीं मिलेगा। क्यों अहम है यह फैसला चंबल क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील इकोसिस्टम में से एक है, जहां घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। लगातार हो रहा अवैध रेत खनन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहा है, किनारों का कटाव बढ़ा रहा है और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती न सिर्फ कानून व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम भी माना जा रहा है। 14 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार 14 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने मुरैना में वन रक्षक की हत्या और चंबल नदी पर बने पुल की नींव तक अवैध खनन के मामले सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह सब राज्य सरकार की निगरानी में हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर रेत माफिया पुल की नींव तक खोद रहे हैं और वन अधिकारियों को कुचलकर मार रहे हैं, तो ऐसे में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। कोर्ट ने पूछा कि यदि पुल गिर जाता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। कोर्ट ने कहा कि ये घटनाएं संकेत देती हैं कि या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में विफल रही है या फिर इसमें अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। पुल की नींव तक की गई खुदाई जानकारी के अनुसार, राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-44 का चंबल पुल मुरैना के राजघाट क्षेत्र में स्थित है। इस पुल के कई पिलरों के नीचे रेत माफिया द्वारा करीब 15 फीट तक खुदाई किए जाने की बात सामने आई है, जिससे संरचना की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा था क्या मुरैना पुलिस प्रशासन को चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन होता दिखाई नहीं देता क्या प्रशासन अंधा है। अवैध उत्खनन रोकने के क्या क्या प्रयत्न किए गए? यह क्यों रुक नहीं पा रहा? इस सब की जानकारी सुप्रीक कोर्ट ने मांगी है। वनरक्षक हत्या मामले में मांगी थी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने वन रक्षक की हत्या के मामले में अब तक की जांच की स्थिति रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पेश करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ राज्यों में वन अधिकारियों को रेत माफिया पर कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार दिए गए थे। इसी तरह मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने भी केंद्र से ऐसे अधिकारों की मांग की है, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। बता दें कि 8 अप्रैल को वन आरक्षक की ट्रेक्टर से कुचल कर हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं इस मामले को संज्ञान में लिया है। वन आरक्षक हरकेश गुर्जर को हत्या के मामले में मुरैना पुलिस से जानकारी मांगी गई। इसमें सोमवार को मुरैना पुलिस की ओर से अपनी दलील में हत्या के तीनों आरोपी को गिरफ्तार बताए। ये खबरें भी पढ़ें… 1. यह खबर भी पढ़ें चंबल में 100 ट्रैक्टर–डंपरों का VIDEO चंबल में अवैध रेत खनन खुल्लम खुल्ला हो रहा है। 1000 से ज्यादा डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में रेत के लिए दिनभर फर्राटा भर रहे हैं। माफिया जेसीबी से नदी को खोखला कर रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। पूरी खबर पढ़िए… 2. BJP नेताओं के ट्रैक्टर ने वन रक्षक को कुचला, मौत मुरैना में रेत का अवैध परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवर ने वन रक्षक को कुचल दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात दिमनी थाना इलाके में रानपुर गांव चौराहे के पास बुधवार सुबह करीब 6 बजे की है। पूरी खबर पढ़िए… 3. सुप्रीम कोर्ट बोला- एमपी सरकार अवैध खनन रोकने में फेल मध्यप्रदेश के मुरैना में वन रक्षक की हत्या और चंबल नदी पर बने पुल की नींव तक अवैध खनन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पूरी खबर पढ़ें… 4. नेशनल चंबल घड़ियाल सैंक्चुरी में अवैध खनन मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे- 44 पर बना चंबल नदी का पुल अवैध रेत खनन के कारण खतरे में आ गया है। यहां लगातार खुदाई किए जाने से पिलर के आसपास 20 से 50 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति जारी रही तो पिलर ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
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