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    चंबल में रेत के अवैध खनन का वीडियो:सुप्रीम कोर्ट की फटकार माफिया पर बेअसर; मशीनों से भर रहे ट्रॉलियां, टीम जांच करने पहुंची

    5 hours ago

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    मुरैना जिले की चंबल सैंक्चुरी से अवैध तरीके से रेत निकालने का एक और वीडियो सामने आया है। यह वीडियो 2-3 जून की दरमियानी रात करीब 12:59 बजे महुआ थाना क्षेत्र के खुर्द घाट का बताया जा रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि लोडर मशीन से रेत निकाली जा रही है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरा जा रहा है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसमें खनन का टाइम और डेट भी डाला है। वहीं वीडियो सामने आने के बाद संबंधित विभागों में हलचल बढ़ गई है। देवरी घड़ियाल अभयारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि विभाग को वीडियो और अवैध खनन की सूचना मिली है। मामले की जांच के लिए वन विभाग और महुआ पुलिस के सहयोग से संयुक्त टीम रवाना की गई है। वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के आदेश दिए हैं गौरतलब है कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एमपी, यूपी और राजस्थान सरकार को लगाई थी फटकार राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है। बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खुलेआम रेत परिवहन कर रहे हैं। कोर्ट ने 6 महीने के भीतर निगरानी तंत्र विकसित करने, CCTV कैमरे लगाने और अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जब्ती के निर्देश दिए हैं। ऑर्गनाइज्ड इलीगल माइनिंग नेटवर्क शब्द का इस्तेमाल किया 20 मई की सुनवाई में कोर्ट ने “organized illegal mining network” शब्द इस्तेमाल किया था, यानी इसे सिर्फ छोटे स्तर का अवैध खनन नहीं माना गया, जो पर्यावरण, वन्यजीव और कानून व्यवस्था तीनों के लिए खतरा बन चुका है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कोर्ट के दबाव में होने वाली औपचारिक कार्रवाई नहीं हो सकती, यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ………………………. ये खबरें भी पढ़ें 1. नेशनल चंबल घड़ियाल सैंक्चुरी में अवैध खनन: एमपी-राजस्थान को जोड़ने वाले 100 करोड़ के पुल पर भी खतरा, खुदाई से 8 पिलर कमजोर मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे- 44 पर बना चंबल नदी का पुल अवैध रेत खनन के कारण खतरे में आ गया है। यहां लगातार खुदाई से पिलर के आसपास 20 से 50 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति जारी रही तो पिलर ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर 2. चंबल में 100 ट्रैक्टर–डंपरों का VIDEO:यहां जाने से अफसर-पुलिस भी डरते हैं; नदी को जेसीबी से खोखला कर घाटों पर रेत के ढेर लगाए चंबल में अवैध रेत खनन खुल्लम खुल्ला हो रहा है। 1000 से ज्यादा डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राॅली नदी में रेत के लिए दिनभर फर्राटा भर रहे हैं। माफिया जेसीबी से नदी को खोखला कर रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। हालात ऐसे हैं कि एसपी ऑफिस, 6 थाने के सामने से यह वाहन दिनभर दौड़ते हैं, लेकिन इन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। पढ़ें पूरी खबर
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