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    आर्यनगर में ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन का फर्जी सौदा:ब्राह्मण महासभा ने पुलिस कमिश्नर से की कार्रवाई की मांग

    1 hour ago

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    शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक ट्रस्टों की जमीनों को लेकर एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। कर्वी (बांदा) से संचालित होने वाले 'श्री बलदेव जी महाराज टेंपल ट्रस्ट' की कानपुर के आर्य नगर स्थित करोड़ों रुपए की कीमती जमीन को फर्जीवाड़े के जरिए बेचने का आरोप लगा है। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय सर्व ब्राह्मण महासभा अब खुलकर मैदान में आ गई है। महासभा ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परशुराम वाटिका के सामने की 1331 वर्ग गज जमीन का 'सौदा' बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि,कानपुर के कुछ धार्मिक लोगों ने उनसे संपर्क कर ट्रस्टों में हो रहे भारी घोटाले की शिकायत की थी। जब संस्था ने अपने स्तर पर जांच कराई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आर्यनगर (8/15, 8/16) में करीब 1331 वर्ग गज की कीमती जमीन है, जो इस धार्मिक ट्रस्ट की है। आरोप है,कि कानपुर के ही रहने वाले शरद सिंहानिया, विदुषपत सिंहानिया और मीनाक्षी सिंहानिया इस ट्रस्ट के कर्ता-धर्ता बने हुए हैं। इन लोगों ने परशुराम वाटिका के सामने मौजूद इस कीमती संपत्ति का बिना किसी कानूनी अनुमति के 'रजिस्टर्ड एग्रीमेंट टू सेल' (बेचने का सौदा) कर डाला। इस सौदे में 1 करोड़ 20 लाख तो ऑन-रिकॉर्ड (नंबर एक में) लिए गए, जबकि बड़ी रकम कैश में लेने का अंदेशा है। न कोर्ट से परमिशन ली, न कायदे माने; दिल्ली ट्रांसफर कर दिया खाता नरेश त्रिपाठी ने कहा नियमों के मुताबिक, किसी भी धार्मिक या सामाजिक ट्रस्ट की प्रॉपर्टी को बेचने से पहले जनपद न्यायाधीश (जिला जज) से बाकायदा परमिशन लेनी जरूरी होती है। लेकिन इस मामले में ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई। इतना ही नहीं, ट्रस्ट के पैसों में हेरफेर करने के लिए इसके बैंक खाते का संचालन भी गुपचुप तरीके से कानपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। फॉरेंसिक जांच में पकड़ी गई चोरी, कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नरेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है,कि इसका पर्दाफाश तब हुआ जब परिवार के ही लोगों ने साल 2024 में फजलगंज थाने में मुकदमा अपराध संख्या 113 दर्ज कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना अधिकारी फजल अहमद ने जब बैंक खातों, ऑडिट रिपोर्ट और दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक लैब) भेजा, तो वहां से आई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। फॉरेंसिक रिपोर्ट में साफ हुआ कि कागजातों पर किए गए दस्तखत पूरी तरह से फर्जी थे। पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट (सीजीएम) में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, वहीं आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। "धार्मिक पैसे से अय्याशी नहीं होने देंगे, समाज के काम आए धन" महासभा के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि,ट्रस्ट का पैसा समाज को आगे बढ़ाने, धर्मशालाएं और रैन बसेरे बनवाने के लिए होता है, किसी के निजी उपभोग या आलीशान बंगले खड़े करने के लिए नहीं। पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले के दस्तावेजों को देखने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है। इस प्रेसवार्ता के दौरान ब्रजेंद्र मिश्रा, हीरेन नाथ दीक्षित और संजय दीक्षित सहित महासभा के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
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