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    'चुनाव आयोग ने कानून तोड़ा तो फैसले रोक देंगे':CJI बोले- फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी; EC ने कहा था- इजाजत मिली

    12 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। उन पर SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लेने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि अगर फैसले बिना सहमति के लिए पाए गए, तो उन्हें वापस लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘Form-6 के किसी भी संशोधन को हमने मंजूरी नहीं दी है। हम यह देखेंगे कि इसमें किसने बदलाव किया।’ दरअसल, 9 दिन पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली है। SIR के अलावा सामान्य अवधि में वही फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे, जो मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत तय हैं। 24 सितंबर: चुनाव आयोग का प्रेस नोट सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, केंद्र, CEC को नोटिस भेजा CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिका पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया और 4 हफ्ते में जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट की 4 बड़ी बातें: कार्रवाई के पहले जवाब जरूरी SIR के खिलाफ 2 PIL दाखिल SIR के खिलाफ 2 PIL दाखिल की गई हैं। राकेश कुमार सिंह ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। इनकी दलीलें एडवोकेट विकास सिंह ने रखीं। वहीं दूसरी याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने लगाई। इनकी ओर से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट CEC को सस्पेंड नहीं कर सकता संविधान में सुप्रीम कोर्ट को CEC को सस्पेंड करने की कोई स्पष्ट या विशेष शक्ति नहीं दी गई है। आर्टिकल 324 के तहत चुनाव कराने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, लेकिन आयोग के फैसलों की कोर्ट में जांच हो सकती है। अगर कोई फैसला कानून या संविधान के खिलाफ पाया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट उस पर रोक लगा सकता है या उसे रद्द कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ ज्ञानेश कुमार पर विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव पैनल के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार चिंता जताई थी। विपक्ष अगले सत्र में महाभियोग लाने की तैयारी में विपक्ष एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। अप्रैल 2026 में भी विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था लेकिन लोकसभा में वह प्रस्ताव खारिज हो गया था, जबकि राज्यसभा में अभी भी लंबित है। ज्ञानेश कुमार पर एक्शन होगा या नहीं, 3 संभावनाएं 1. कार्यकाल के फैसलों पर पुलिस एक्शन नहीं हो सकता: ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा 16 के तहत सुरक्षा मिली है। जब तक यह प्रावधान मौजूद है, उन्हें केवल पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारी के जरिए हटाना, उन पर केस चलाना कानूनी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है। 2. भाजपा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया: ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल जनवरी 2029 तक है, यानी अभी 2 साल कम से कम ज्ञानेश अपने पद पर रहेंगे। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का मानना है कि ये आरोप आधारहीन हैं। 3. आखिरी रास्ता महाभियोग, लेकिन विपक्ष के पास बहुमत संभव नहीं: अनुच्छेद 324 (5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग के तहत ही हटाया जा सकता है। महाभियोग प्रस्ताव को पेश करने के लिए लोकसभा में 100 तो राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति को यह तय करना होता है कि इसे स्वीकार किया जाए या नहीं। मौजूदा हालात में विपक्ष को महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में 2/3 की जरूरत होगी। यानी लोकसभा में 362 सांसदों और राज्यसभा में 164 सांसदों का समर्थन हो। विपक्ष के पास संसद में इस वक्त इतना बड़ा समर्थन नहीं है। ---------------------- मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
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