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    चौरी चौरा मां-बेटी हत्याकांड, बीत गए 365 दिन:हत्यारों का नहीं चला पता, गोरखपुर पुलिस पॉलीग्राफ रिपोर्ट से पर्दाफाश का कर रही दावा

    4 hours ago

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    गोरखपुर के चौरी चौरा क्षेत्र में 29 मार्च 2025 की रात मां-बेटी की गड़ासे से काटकर हत्या कर दी गई थी। इस चर्चित हत्याकांड के एक साल बीतने के बाद भी हत्यारों का पता नहीं चल सका है। वहीं पुलिस का दावा है कि पॉलीग्राफ परीक्षण की रिपोर्ट आ गई है। बहुत जल्द इसका अध्ययन कर हत्यारे तक पुलिस पहुंच जाएगी। इस रिपोर्ट से हत्या की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलेगी। साथ ही साजिश में शामिल लोगों की भूमिका का भी पता चलेगा। अधिकारियों का मानना है कि रिपोर्ट से अब तक जांच में सामने आए विरोधाभास काफी हद तक दूर हो सकेंगे। गाजियाबाद में कराया गया पॉलीग्राफ टेस्ट विवेचना के दौरान बयानों और परिस्थितियों में सामने आए अंतर को देखते हुए पुलिस टीम पिछले महीने गाजियाबाद पॉलीग्राफ टेस्ट कराने गई थी। सीओ कैंपियरगंज अनुराग सिंह के नेतृत्व में गई टीम ने मृतका की बड़ी बेटी खुशबू, तीन नामजद आरोपियों और दो संदिग्धों का परीक्षण कराया था। जिसकी रिपोर्ट गोरखपुर आ गई है। बड़ी बेटी को कमरे में बंद कर दिए थे हत्यारे वारदात 29 मार्च 2025 की रात करीब 1:30 बजे शिवपुर चकदहा गांव में हुई थी। घर में सो रही पूनम निषाद (40) और उसकी छोटी बेटी अनुष्का (13) की गड़ासे से मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दौरान बड़ी बेटी खुशबू को हमलावरों ने दूसरे कमरे में बंद कर दिया था। जांच में सामने आया था कि आरोपी पूनम का मोबाइल फोन अपने साथ ले गए थे, जो एक सप्ताह बाद गांव के बाहर खेत में मिला। बड़ी बेटी ने दरवाजे के छेद से देखी थी घटना खुशबू ने पुलिस को बताया था कि उसने दरवाजे के छेद से हमलावरों को देखा था। उसकी तहरीर पर गांव के संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता सूरज, भाई सुरेंद्र और दो अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस जांच में कई बिंदुओं पर खुशबू के बयान और घटनास्थल की परिस्थितियां मेल नहीं खा रही थीं। इसी वजह से वैज्ञानिक तरीके से सच्चाई सामने लाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट का सहारा लिया गया। एक आरोपी को भिजवाया था जेल मामले में नामजद आरोपी संजय को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया था। इस मामले की चार्जशीट 90 दिन में नहीं लगने के कारण आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई थी। पुलिस का कहना था कि आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले थे। जो फिलहाल जमानत पर बाहर है। जांच के दौरान पुलिस को अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका रही है। अब तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि करीब 50 संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की गई है। कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई, लेकिन ठोस साक्ष्य के अभाव में उन्हें छोड़ना पड़ा। अब पॉलीग्राफ रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी। एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि रिपोर्ट आ गई है। पॉलीग्राफ परीक्षण की अलग-अलग रिपोर्ट है। जिसके अध्ययन से इस केस को सुलझाने में मदद मिलेगी।
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