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    चित्रकूट में प्रबुद्ध जन गोष्ठी सम्पन्न:भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने पर हुआ मंथन

    7 hours ago

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    धर्मनगरी चित्रकूट में आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी में भारत को पुनः 'विश्व गुरु' बनाने के विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य सुरेश जोशी (भैयाजी जोशी) ने मुख्य रूप से भाग लिया। यह जनसंवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मझगवां खंड, सतना द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ स्थित लोहिया सभागार में आयोजित किया गया था। गोष्ठी में शिक्षा, समाज सेवा, व्यवसाय और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्धजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। भैयाजी जोशी ने उपस्थित प्रबुद्धजनों के समक्ष यह प्रश्न रखा कि भारत के पास ऐसी कौन सी विशिष्टताएँ हैं, जिनके बल पर वह विश्व में अपनी श्रेष्ठ पहचान पुनः स्थापित कर सकता है। अपने संबोधन में भैयाजी जोशी ने संघ की लगभग सौ वर्षों की यात्रा का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने संघ के मूल उद्देश्यों—सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों का संवर्धन और सशक्त राष्ट्र निर्माण—पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित करना है, जिससे राष्ट्र मजबूत बन सके। उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष और वीर सावरकर के विचारों का उल्लेख किया। जोशी ने कहा कि इन महापुरुषों ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और मानव कल्याण की भावना को विश्व के लिए मार्गदर्शक बताया है। भैयाजी जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की आत्मा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत में निहित है। यह सिद्धांत पूरी दुनिया को शांति, समरसता और सह-अस्तित्व का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो जाए, तो भारत फिर से वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। गोष्ठी में उपस्थित अन्य प्रबुद्धजनों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को भारत की वैश्विक पहचान के रूप में रेखांकित किया। कार्यक्रम में जिला संघ चालक राम बेटा कुशवाहा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। अंत में आयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इस वैचारिक विमर्श को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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