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    डीआईओएस कार्यालय में 1 करोड़ से ज्यादा का घोटाला:सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निलंबित, पत्नी के खाते में ट्रांजेक्शन से खुला मामला, अब तक FIR नहीं

    8 hours ago

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    पीलीभीत के शिक्षा विभाग (डीआईओएस कार्यालय) में एक करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इतने बड़े वित्तीय अनियमितता के बावजूद अब तक केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निलंबित किया गया है, जिससे विभागीय अधिकारियों और ट्रेजरी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। फिलहाल मामले में कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। जांच में सामने आया कि डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इलहाम शम्सी की पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते में लगभग एक करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। सवाल यह उठ रहा है कि एक निचले स्तर का कर्मचारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ट्रेजरी से इतनी बड़ी धनराशि का लेन-देन कैसे कर सकता है। तत्कालीन डीआईओएस के कार्यकाल में हुई अनियमितता आरोप है कि यह पूरी वित्तीय गड़बड़ी तत्कालीन डीआईओएस राजीव कुमार के कार्यकाल के दौरान हुई। हालांकि अब तक कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारी तक सीमित रखी गई है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच समिति की भूमिका पर भी उठे सवाल मामले की जांच के लिए गठित समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार श्रीवास की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि जांच के दौरान मुख्य दोषियों और प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई। FIR न होने से बढ़ी शंका, ट्रेजरी की भूमिका पर चर्चा इतने बड़े वित्तीय गबन के बावजूद अब तक पुलिस में मुकदमा दर्ज न होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ट्रेजरी अधिकारियों की अनुमति या डिजिटल सिग्नेचर के बिना इतनी बड़ी रकम का ट्रांसफर संभव नहीं है, ऐसे में उनकी भूमिका की जांच भी जरूरी मानी जा रही है। कर्मचारियों और जनता के उठ रहे तीखे सवाल घोटाले के सामने आने के बाद विभाग के कर्मचारियों और आम लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं— जिस कर्मचारी की पत्नी के खाते में करोड़ों रुपये पहुंचे, उस पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? ट्रेजरी विभाग के संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या शासन इस मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराएगा? सीडीओ बोले—रिपोर्ट डीएम को भेजी, आगे निर्णय वहीं से सीडीओ राजेंद्र श्रीवास ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। अब आगे की कार्रवाई जिलाधिकारी स्तर से की जाएगी।
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