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    Dhar Bhojshala Case में आये MP High Court के ऐतिहासिक फैसले को समझिये

    17 hours ago

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    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी अर्थात सरस्वती का मंदिर मानते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि इस स्थल पर हिंदू उपासना की परंपरा निरंतर बनी रही है और समय के साथ नियमित पूजा कभी समाप्त नहीं हुई। अदालत ने यह भी माना कि ऐतिहासिक अभिलेखों, साहित्यिक संदर्भों और स्थापत्य प्रमाणों से यह स्थापित होता है कि भोजशाला राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र थी तथा वहां देवी सरस्वती का मंदिर मौजूद था।न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि भारत सरकार लंदन स्थित ब्रिटिश संग्रहालय से देवी वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने पर विचार कर सकती है। साथ ही अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी अथवा किसी अन्य नए वक्फ निकाय को धार में मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। भोजशाला परिसर का समग्र प्रशासन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास ही रहेगा और वही इसके रखरखाव तथा संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगा।इसे भी पढ़ें: Bhojshala Verdict पर भड़के Owaisi, बोले- 'दूसरा Babri', अब Supreme Court में होगी जंगफैसले के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सात अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार प्रदान करते हुए भोजशाला परिसर को राजा भोज से संबंधित माना है। उन्होंने यह भी कहा कि लंदन संग्रहालय में रखी देवी वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग पर भी अदालत ने सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी सरकार के समक्ष अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी गई है।विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने सरकार से मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने पर भी विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अब परिसर में केवल हिंदू पूजा होगी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पूर्व में दिया गया नमाज का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी का निर्देश भी दिया गया है।उधर, फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जिले में शांति तथा कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।हम आपको बता दें कि भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि धार स्थित यह परिसर देवी वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का स्थल मानता है। इसी धार्मिक स्वरूप को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी संघर्ष जारी था।हम आपको बता दें कि इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने बारह मई को अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने छह अप्रैल से नियमित रूप से सुनवाई की थी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, हस्तक्षेपकर्ताओं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सहित सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। भोज उत्सव समिति के अधिवक्ता श्रीश दुबे ने बताया कि लगभग पच्चीस दिनों तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने करीब साठ घंटे तक सभी पक्षों को विस्तार से सुना।उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में उठाई गई कमियों और सवालों पर भी विस्तार से जवाब दिया गया। दूसरी ओर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिवक्ता अविरल खरे ने कहा कि भोजशाला परिसर का सर्वेक्षण पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किया गया था। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट दो हजार पृष्ठों से अधिक की है, जिसमें सर्वेक्षण की प्रक्रिया, जांच के तरीके, विभिन्न स्थानों पर प्राप्त निष्कर्ष और विश्लेषणात्मक अध्ययन का विस्तृत विवरण शामिल है।हम आपको याद दिला दें कि वर्ष 2003 की व्यवस्था के अनुसार हिंदू पक्ष को मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम पक्ष शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करता था। अब उच्च न्यायालय के ताजा फैसले के बाद इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि वह इस फैसले को आगे चुनौती देंगे।
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