Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    एंटी पेपर-लीक एक्ट से यूपी के 2 विधायक जेल जाएंगे?:बेदीराम-विपुल दुबे पर 20 साल से केस चल रहे; साजिश तय, सजा नहीं

    4 hours ago

    1

    0

    NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार एंटी पेपर लीक बिल लाई है। इसमें 2 बड़े प्रावधान किए गए हैं। पहला. पेपर लीक के मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के अंदर ट्रायल पूरा होगा। दूसरा. सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। मौके की नजाकत को भांपते हुए यूपी के पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने 2006 के रेलवे ग्रुप डी पेपर लीक मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। इस मामले में भाजपा के सहयोगी दलों के 2 विधायक आरोपी हैं। MP-MLA की स्पेशल कोर्ट में केस चल रहा है। ये फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह ही काम करता है, लेकिन 20 सालों में सिर्फ यही साबित हो सका कि इन विधायकों ने पेपर लीक की साजिश रची थी। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के विधायक बेदीराम और संजय निषाद की निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे समेत 22 आरोपी जमानत पर बाहर हैं। इनमें कुछ की मौत भी हो चुकी है। बेदी राम इस वक्त गाजीपुर की जखनिया सीट से, जबकि विपुल दुबे भदोही विधानसभा से विधायक हैं। कोर्ट की फटकार के बाद विधायक पेश हुए चुनावी हलफनामा में 9 केस, ज्यादातर पेपर लीक के सुभासपा विधायक बेदीराम ने अपने चुनावी हलफनामे में 9 आपराधिक मामलों का जिक्र किया है। ज्यादातर केस भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़े हैं। इनमें रेलवे ग्रुप-डी, रेलवे लोको पायलट, भोपाल-जयपुर रेलवे भर्ती, मध्य प्रदेश पीसीएस, आयुर्वेद भर्ती और छत्तीसगढ़ CPMT भर्ती जैसे मामलों के केस शामिल हैं। इन 9 मामलों में से 8 में अदालत आरोप तय कर चुकी हैं। इन मामलों में ट्रायल चल रहा है। हालांकि, अब तक किसी भी मामले में अदालत का फैसला नहीं आया है। बेदीराम, सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बेहद करीबी माने जाते हैं। 'दैनिक भास्कर' ने विधायक बेदीराम से फोन पर उनका पक्ष जानना चाहा। फोन हर बार उनके पीएस ने उठाया। कहा- ‘विधायक जी व्यस्त हैं, बाद में बात कराएंगे।’ हालांकि बाद में भी बात करवाई नहीं गई। विपुल दुबे पर गैंगस्टर एक्ट, कहा- अभी कुछ नहीं बोलूंगा निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मामला दर्ज है। यह केस 2006 के रेलवे ग्रुप-डी पेपर लीक से जुड़ा है। एसटीएफ ने जांच में उन्हें इस गिरोह में बेदी राम का करीबी सहयोगी बताया था। जुलाई, 2024 में कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए। फिलहाल वह जमानत पर हैं और मामले का ट्रायल जारी है। इस मामले में विपुल दुबे कहते हैं कि मामला हाईकोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। जानिए क्यों नए 'एंटी पेपर लीक कानून' के दायरे में नहीं आएंगे आरोपी? प्रतियोगी परीक्षाओं में धोखाधड़ी और साठ-गांठ को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 'लोक परीक्षा अधिनियम 2024' लागू किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राज्य स्तर पर पेपर लीक रोधी कड़ा कानून पारित किया है। इन कानूनों में दोषियों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के वकील शारिक अब्बासी कहते हैं- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20 (1) मौलिक अधिकार की गारंटी देता है कि किसी व्यक्ति को केवल उसी कानून के उल्लंघन के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, जो अपराध के समय लागू था। अपराध के समय जो अधिकतम सजा का प्रावधान था, बाद में कानून बदलकर उस अपराध के लिए उससे ज्यादा सजा नहीं दी जा सकती। पूर्व IPS अफसर ने मुख्यमंत्री से की शिकायत पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेटर लिखा। उनका कहना है कि पेपर लीक को लेकर पूरे देश में नाराजगी है। केंद्र और राज्य सरकारें भी इस पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने की बात कह रही हैं। ऐसे में 20 साल पुराने और अभी तक लंबित पेपर लीक मामलों को भी उसी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। --------------------- ये भी पढ़ें- जौहर यूनिवर्सिटी नहीं टूटेगी, इसके पीछे 5 वजह:दिल्ली जैसे आंदोलन का डर; 3000 स्टूडेंट्स की शिफ्टिंग बड़ा चैलेंज जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ढहाना आसान नहीं है। दिल्ली के Gen-Z (जेन-जी) प्रदर्शन के बाद समीकरण बदले हैं। शिक्षा और छात्रों से जुड़ी यूनिवर्सिटी पर भी शासन का रुख नरम हुआ है। यही वजह है कि 27 जुलाई को मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। पढ़िए पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    राम या रावण…पहला कांवड़िया कौन:4 करोड़ कांवड़िए जल चढ़ाएंगे; यूपी में 8 हजार करोड़ का बिजनेस, कितनी बदली कांवड़ यात्रा
    Next Article
    ब्लैकमेलिंग से तंग अकाउंटेंट ने किया सुसाइड:प्रयागराज में लिखा- युवती कह रही थी, शादी करो या 30 लाख रुपये दो

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment