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    फर्जी आईएएस बनकर ठगी करने वाली बहनें गिरफ्तार:नौकरी के नाम पर वसूले लाखों रुपए, फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेजे

    15 hours ago

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    बरेली के बारादरी इलाके में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और जनता दोनों को हैरान कर दिया है। खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली एक महिला और उसकी बहन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई बेरोजगारों से लाखों रुपए ऐंठ लिए। पुलिस ने यह कार्रवाई बारादरी थाने में दर्ज कराई गई एक सामूहिक शिकायत के आधार पर की है। फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ कर रही है और इस गिरोह के अन्य संपर्कों को खंगालने में जुटी है। एसडीएम पद का झांसा देकर शुरू हुई ठगी ठगी का यह पूरा खेल साल 2022 से शुरू हुआ था। फाईक एन्क्लेव की रहने वाली प्रीति लॉयल ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात शिखा पाठक नाम की महिला से हुई थी। शिखा ने जाल बिछाते हुए प्रीति को विश्वास दिलाया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा एक बड़ी अधिकारी है और एसडीएम के पद पर तैनात है। शिखा ने दावा किया कि उसकी बहन की ऊंची पहुंच है और वह पैसे के बदले किसी को भी सरकारी नौकरी दिलवा सकती है। इस झांसे में आकर प्रीति के साथ-साथ उसके परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद अली भी नौकरी की उम्मीद में इस जाल में फंस गए। बैंक खातों और नकद में लिए लाखों रुपए आरोपियों ने पीड़ितों को अपने घर बुलाकर भरोसा जीता। जब ये लोग विप्रा शर्मा और शिखा के घर पहुंचे, तो वहां उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मौजूद थे। विप्रा शर्मा ने खुद को रसूखदार अधिकारी बताते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों पर भर्ती निकली है और वह अधिकारियों को पैसा देकर इनकी नियुक्ति करवा देगी। इसके बाद पैसों के लेन-देन का सिलसिला शुरू हुआ। प्रीति ने दो लाख रुपए बैंक खाते में जमा किए, जबकि आदिल खान ने एक लाख अस्सी हजार रुपए दिए। मुशाहिद अली ने पांच लाख इक्कीस हजार रुपए की बड़ी रकम आरोपियों के घर जाकर नकद थमा दी। वहीं संतोष कुमार ने भी दो लाख रुपए का भुगतान किया। लखनऊ मुख्यालय पहुंचने पर खुला फर्जीवाड़े का राज ठगी की पराकाष्ठा तब हुई जब आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए। विप्रा शर्मा ने राजस्व परिषद लखनऊ के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन पर तत्कालीन उच्च अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए। यह नियुक्ति पत्र डाक, व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए पीड़ितों को भेजे गए। जब ये लोग जॉइनिंग के लिए लखनऊ पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने बताया कि ये सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं। इस खुलासे के बाद पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्हें समझ आया कि वे एक बड़े गिरोह का शिकार हो चुके हैं। गाड़ी पर नीली बत्ती और एडीएम की प्लेट लगाकर चलती थी जांच में यह भी सामने आया है कि विप्रा शर्मा पूरी तरह फिल्मी अंदाज में अपना रसूख दिखाती थी। वह अपनी गाड़ी पर एडीएम एफआर उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर घूमती थी ताकि किसी को शक न हो। जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने उन्हें धमकी दी और पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने हिम्मत जुटाकर बारादरी पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस फर्जी आईएएस ने शहर में और कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है।
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