Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    फ्रांस में शिक्षकों की कमी को लेकर आंदोलन हिंसक हुआ:धमाके में 15 साल के छात्र का हाथ उड़ा; 5 हजार गिरफ्तार, 87% गिरफ्तार नाबालिग

    10 hours ago

    1

    0

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र सड़कों पर उतर गए हैं। सितंबर में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। छात्र स्कूलों में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी का विरोध कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में छात्रों ने सैकड़ों स्कूलों को बंद कराया। आंदोलन के दौरान कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले पिछले हफ्ते 14 साल के ईडन नाम के छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ था और उसे बड़ी सर्जरी करानी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान कम से कम 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 87% नाबालिग हैं। मंगलवार को देशभर में सबसे बड़े प्रदर्शन का ऐलान मंगलवार को छात्रों के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन की तैयारी है। प्रमुख छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लिसेन ने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। शिक्षकों के संगठनों ने भी अपने सदस्यों से प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके मुकाबले कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षा कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ कदमों की घोषणा की है। उन्होंने स्कूलों में बदलाव लाने का वादा किया है। हालांकि, हिंसा को लेकर उन्होंने साफ कहा है कि सरकार नरमी नहीं बरतेगी। प्रदर्शन के दौरान कई जगह स्कूलों की नाकेबंदी की गई और कूड़ेदानों में आग लगाई गई। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे के मुताबिक आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों को जला दिया गया या उनमें तोड़फोड़ की गई। 21 सितंबर को छोटे से विरोध से शुरू हुआ आंदोलन आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों की मांग थी कि स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर की जाए। स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक दूसरे इलाकों में भी विरोध शुरू हो चुका था। इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी आंदोलन में शामिल हो गए। छात्र नेता मानेस नडेल के मुताबिक, जब शुरुआती स्कूल में हड़ताल खत्म हुई, तब तक दूसरे इलाकों में आंदोलन फैल चुका था। उनका दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूल पहले कभी किसी आंदोलन में शामिल नहीं हुए थे। स्कूलों में छात्र बढ़े, शिक्षक घटे फ्रांस में एक साथ कई मोर्चों पर संकट फ्रांस में इस समय विरोध सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरे भी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारी: सरकार के खर्च कम करने और वेतन रोकने की योजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें डर है कि बजट कटौती का असर उनकी सैलरी और दूसरी सुविधाओं पर पड़ेगा। शिक्षक: स्कूलों में शिक्षकों की कमी और काम के बढ़ते दबाव के साथ सरकार की बजट नीतियों का विरोध कर रहे हैं। फायर फाइटर: बेहतर संसाधन, फंडिंग और काम करने की सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। गर्मियों में लगी बड़ी जंगल की आग के बाद उनके पास पर्याप्त संसाधन होने का मुद्दा भी उठा है। स्वास्थ्यकर्मी: सरकारी खर्च और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को पर्याप्त संसाधन मिलने चाहिए। मछुआरे: डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। महंगे ईंधन से मछली पकड़ने का खर्च बढ़ गया है, इसलिए उन्होंने बंदरगाहों और ईंधन टर्मिनलों को रोक दिया है। ईरान युद्ध से ईंधन महंगा हुआ फ्रांस की परेशानी में महंगे ईंधन ने भी इजाफा किया है। ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। स्थिति संभालने के लिए G7 देशों ने अपने भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उम्मीद है कि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें जल्दी कम होंगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी मुश्किल- पैसा कहां से लाएं फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है। यह देश की सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119% के बराबर है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने से इस कर्ज को संभालने का खर्च भी बढ़ रहा है। 2027 में कर्ज पर ब्याज चुकाने का खर्च करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। फ्रांस की आबादी बूढ़ी हो रही है। इसलिए पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण रक्षा खर्च भी बढ़ा है। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें… स्पेन में किराएदार को घर से निकालने पर सरकार गिरी:87 साल की महिला महंगा किराया नहीं चुका पाई; 8 महीने पहले चुनाव होंगे स्पेन में 87 साल की एक महिला को घर से निकालना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। महंगे किराए और लोगों को घर से निकाले जाने के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे
    Next Article
    सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज:हूती विद्रोहियों के खिलाफ साथ आए तीनों देश; पिछले महीने पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया था

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment