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    फिशर वन दरगाह पर फैसला करीब:अप्रैल के मध्य तक आएगा आदेश, ध्वस्तीकरण की संभावना बढ़ी

    3 hours ago

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    इटावा शहर के फिशर वन क्षेत्र में स्थित सैंकड़ों वर्ष पुरानी बीहड़ वाले सैय्यद बाबा दरगाह को लेकर स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। वन विभाग की कार्रवाई और कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के बाद 15 अप्रैल तक फैसला आने की उम्मीद है। 28 मार्च की अंतिम सुनवाई में दरगाह पक्ष ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे ध्वस्तीकरण के आदेश की संभावना काफी बढ़ गई है। यह मामला अब प्रशासन और स्थानीय लोगों दोनों के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है। वन विभाग को मिली शिकायत के बाद जब टीम ने मौके पर जांच की, तो दरगाह का कोई भी रिकॉर्ड विभागीय दस्तावेजों में नहीं मिला। यह दरगाह करीब 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि पर बनी पाई गई। विभाग ने इसे स्पष्ट रूप से अवैध कब्जा मानते हुए नोटिस जारी किया और आगे की कार्रवाई शुरू की। इस रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। 800 साल पुरानी होने का दावा, लेकिन सबूत कमजोर डीएफओ कोर्ट में जब मामला पहुंचा, तो दरगाह पक्ष ने इसे करीब 800 साल पुरानी मजार बताया। उन्होंने अपने दावे को मजबूत करने के लिए समय भी मांगा। कोर्ट ने उन्हें पूरा मौका दिया, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई भी ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आ सका, जो इस दावे को पुख्ता साबित कर सके। अंतिम सुनवाई में भी नहीं बदली स्थिति 28 मार्च को हुई अंतिम सुनवाई इस मामले का अहम पड़ाव साबित हुई। दरगाह पक्ष ने एक किताब का पन्ना पेश किया, जिसमें दरगाह का जिक्र होने की बात कही गई। हालांकि वन विभाग ने इसे पर्याप्त साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया। विभाग का कहना है कि वक्फ और राजस्व रिकॉर्ड में भी इस दरगाह का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे इसकी वैधता पर सवाल और गहरे हो गए हैं। फैसले के बाद सिर्फ अपील का रास्ता अब सभी की नजरें 15 अप्रैल पर टिकी हैं। अगर कोर्ट ध्वस्तीकरण का आदेश देता है, तो दरगाह पक्ष के पास केवल शासन स्तर पर अपील करने का विकल्प बचेगा। ऐसे में यह फैसला न सिर्फ एक संरचना के भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन के रुख को भी साफ करेगा।
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