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    फुटबॉल वर्ल्ड कप:96 साल बाद फाइनल दो स्पेनिश भाषी देशों के बीच, स्पेन-अर्जेंटीना की भाषाएं-कल्चर एक जैसे

    11 hours ago

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    फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल सिर्फ स्पेन और अर्जेंटीना की दो टीमों के बीच नहीं होगा, बल्कि दो ऐसे देशों के बीच भी होगा, जिनके रिश्ते सदियों पुराने हैं। दोनों की भाषा एक है, संस्कृति में कई समानताएं हैं और लाखों परिवार ऐसे हैं जिनकी जड़ें दोनों देशों से जुड़ी हैं। ऐसे में मैच कई लोगों के लिए भावनात्मक परीक्षा बन गया है। सवाल यही है कि दिल की सुनी जाए या जन्मभूमि की। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में रहने वाले 75 वर्षीय जुआन मैनुएल पोसादा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उनका जन्म स्पेन में हुआ था, लेकिन 1968 में वे अर्जेंटीना आकर बस गए। वे कहते हैं, ‘मेरा दिल स्पेन के साथ है, लेकिन अगर अर्जेंटीना जीत गया तो भी मुझे दुख नहीं होगा।’ उनके परिवार में भी यही दुविधा है। उनका पोता अर्जेंटीना का समर्थक है और उसने दादा से वादा लिया है कि अगर अर्जेंटीना जीता तो वे उसकी टीम की जर्सी पहनकर जश्न मनाएंगे। 81 वर्षीय मैनुएल फर्नांडीज असेवेडो भी बचपन में स्पेन छोड़कर अर्जेंटीना आ गए थे। उनकी बेटी और पोती यहीं पैदा हुईं। वे कहते हैं कि दोनों देशों से उनका समान लगाव है और वे सिर्फ यही चाहते हैं कि बेहतर टीम जीते। स्पेन और अर्जेंटीना का रिश्ता सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है। 16वीं सदी में स्पेन के ही एक खोजकर्ता पेड्रो डी मेंडोसा ने ब्यूनस आयर्स की स्थापना की थी। बाद में बड़ी संख्या में स्पेनिश नागरिक अर्जेंटीना जाकर बस गए। इसी कारण दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध लगातार मजबूत होते गए। साहित्य, संगीत और खानपान के साथ-साथ फुटबॉल ने भी इस रिश्ते को नई पहचान दी। रियल मैड्रिड के लिए अल्फ्रेडो डी स्टेफानो और बार्सिलोना के लिए लियोनेल मेसी जैसे महान खिलाड़ियों ने दोनों देशों को भावनात्मक रूप से और करीब ला दिया। वर्ल्ड कप के इतिहास में स्पेन और अर्जेंटीना की टक्कर सिर्फ एक बार हुई है। 1966 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण में अर्जेंटीना ने स्पेन को हराया था। अब पहली बार दोनों टीमें फाइनल में आमने-सामने हैं। यह वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा ऐसा फाइनल होगा, जिसमें दो स्पेनिश भाषी देश खिताब के लिए भिड़ेंगे। इससे पहले 1930 में उरुग्वे और अर्जेंटीना भिड़े थे। पिछले कुछ दशकों में आर्थिक संकट और सैन्य शासन के बाद हजारों अर्जेंटीनी बेहतर भविष्य के लिए स्पेन जाकर बस गए। स्पेन में अर्जेंटीना में जन्मे करीब 4.5 लाख लोग रह रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यह मुकाबला किसी पारिवारिक उत्सव जैसा है। सोशल मीडिया पर अर्जेंटीना-स्पेन के परिवारों के मजेदार वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें बच्चे किस टीम का समर्थन करेंगे, इसे लेकर घरों में हल्की-फुल्की नोकझोंक दिखाई दे रही है। यही वजह है कि फाइनल सिर्फ चैम्पियन तय नहीं करेगा, बल्कि उन लाखों परिवारों की भावनाओं को भी मैदान पर ले आएगा, जिनके दिल में स्पेन व अर्जेंटीना दोनों के लिए बराबर जगह है।
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