Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    फतेहपुर में मीराबाई की तपोभूमि:जहां भोग न लगने पर खुद हलवाई की दुकान पहुंचे थे भगवान

    2 hours ago

    1

    0

    उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद स्थित मलवां ब्लॉक के शिवराजपुर (जिसे पुराणों में आदिकाशी कहा जाता है) की एक प्रसिद्ध मान्यता है। पवित्र गंगा तट पर स्थित यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि कृष्ण प्रेम में दीवानी मीराबाई की तपोभूमि है। मान्यता है कि पति महाराणा भोजराज की मृत्यु के बाद सती प्रथा का विरोध कर मीराबाई घर से निकल पड़ी थीं। संत रविदास को अपना गुरु मानकर और कई बार जहर के प्याले पीकर भी कृष्ण भक्ति में लीन मीरा, भ्रमण करते हुए शिवराजपुर पहुंचीं और इसे अपनी तपस्थली बनाया। वे अपने साथ अराध्य 'गिरधर गोपाल' की मूर्ति लाई थीं। जब वे यहां से प्रस्थान करने लगीं, तो लाख कोशिशों के बाद भी वह मूर्ति अपने स्थान से नहीं उठी। इसके बाद मीराबाई ने उस मूर्ति को यहीं स्थापित कर दिया और कृष्ण के गुणगान करते हुए आगे बढ़ गईं। भोग की वो चमत्कारिक कथा इस मंदिर से एक अद्भुत चमत्कार भी जुड़ा है। वर्तमान पुजारी हरिओम दीक्षित बताते हैं कि एक बार उनके बाबा और उनके भाई के बीच किसी बात पर विवाद हो गया, जिसके चलते मंदिर में भगवान को भोग नहीं लग पाया। तब चमत्कार हुआ। गिरधर गोपाल खुद एक बालक का रूप धारण कर चांदी का कटोरा लेकर लाला हलवाई की दुकान पर प्रसाद लेने पहुंच गए। जब हलवाई ने मंदिर आकर वह कटोरा दिखाया, तो पूरे परिवार को अपनी गलती पर भारी पश्चाताप हुआ। उस दिन के बाद से आज तक भोग में कभी कोई चूक नहीं हुई है। सात पीढ़ियों से सेवा में जुटा है एक ही परिवार इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके कठोर नियम हैं। स्थापना के बाद से अब तक एक ही परिवार इसकी पूजा करता आ रहा है। वर्तमान में सातवीं पीढ़ी के रूप में हरिओम दीक्षित यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। परिवार की निष्ठा ऐसी है कि यदि घर में किसी की मृत्यु भी हो जाए, तो पुजारी 'सूतक' के दौरान घर नहीं जाते और मंदिर में ही रहकर पूरी शुद्धता के साथ भगवान की सेवा करते हैं। विश्व की इकलौती अष्टभुजी मूर्ति बताया जाता है कि पूरे विश्व में अष्टभुजी (आठ भुजाओं वाले) गिरधर गोपाल की ऐसी अद्वितीय मूर्ति कहीं और नहीं है। पहले इस मंदिर के प्रसाद का पूरा खर्च चित्तौड़ राजघराने से आता था, जो अब बंद हो चुका है। अब रूरा में स्थित मंदिर की दस बीघा जमीन की आय से ही भगवान के भोग और मंदिर की व्यवस्था चलती है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां गिरधर गोपाल के दर्शन कर खुद को धन्य मानते हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    वाहन की टक्कर से बाइक सवार दो दोस्तों की मौत:संभल में 20-25 फीट दूर जा गिरे, घर लौटते समय हादसा
    Next Article
    बदायूं के कृषि विज्ञान केंद्र उझानी में प्रशासनिक बदलाव:डॉ. फैज मोहसिन के रिटायर होने के बाद विश्वविद्यालय ने जारी किया आदेश

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment