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    गोंडा में एशिया की सबसे ऊंची शिवलिंग का ड्रोन VIDEO:बिना एड़ी उठाए नहीं कर पा रहे जलाभिषेक, 7 घंटे से लंबी लाइन

    1 hour ago

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    गोंडा जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर एशिया की सबसे ऊंची शिवलिंग वाले पृथ्वीनाथ मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। VIDEO वीडियो में साफ देखा जा सकता है भक्तों की भीड़ किस तरीके से जलाभिषेक को लेकर लगी हुई है। पिछले सात घंटे से श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर जलाभिषेक कर रहे हैं। यहां गोंडा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी हजारों की संख्या में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह शिवलिंग लगभग 6000 वर्ष पुरानी है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने बकासुर राक्षस का वध कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए इसे स्थापित किया था। पांडवों द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर का नाम भीमेश्वर महादेव मंदिर रखा गया था। 5 तस्वीरों में देखिए मंदिर… लगभग 500 साल पहले यह ऐतिहासिक मंदिर जर्जर हो गया था और शिवलिंग जमीन में समा गई थी। बाद में, पृथ्वीराज सिंह नामक एक युवक अपनी गौशाला के निर्माण के लिए ईंटें निकलवा रहा था, तभी यह विशाल शिवलिंग पुनः प्राप्त हुई। पृथ्वीराज सिंह ने ही इस मंदिर का निर्माण कराया और इसका नाम भीमेश्वर महादेव मंदिर से बदलकर पृथ्वीनाथ मंदिर रखा। इस विशाल शिवलिंग की कुल लंबाई 54 फीट है और इसमें सात अरघे हैं, जिन पर पृथ्वीनाथ मंदिर बना हुआ है। पहला अरघा काली कसौटी नामक दुर्लभ पत्थर का बना है। जिस पर भक्त जलाभिषेक करते हैं। शेष छह अरघे अभी भी जमीन के नीचे हैं। वर्तमान में, शिवलिंग का 49 फीट हिस्सा जमीन के नीचे है, जबकि 5.25 फीट (सवा पांच फीट) हिस्सा ऊपर दिखाई देता है। मंदिर की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। इस विशाल शिवलिंग की यह भी खासियत है। कि बिना ऐड़ी उठाए हुए कोई भी व्यक्ति भगवान शिव के शिवलिंग पर सीधे जलाभिषेक नहीं कर सकता है। वहीं तत्कालीन सपा सरकार में पूर्व कृषि मंत्री रहे कुंवर आनंद सिंह ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर के इसकी जांच करवाई थी। तब जाकर के सच्चाई सामने आई थी कि यह विशाल शिवलिंग कसौटी के पत्थर पर बना हुआ है जिससे सोना तराशा जाता है। कजरी तीज त्योहार पर गोंडा में इसी मंदिर पर लगभग 10 लाख से अधिक श्रद्धालु रात्रि 12:00 बजे से ही लाइनों में लगकर के जलाभिषेक करते हैं और सावन के महीना में भी यहां पर प्रतिदिन लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ रहती है।
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