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    गोंडा में मगरमच्छों के हमले बढ़े, विधायक ने लिखा पत्र:कहा- टीएसए इंडिया जैसे सक्षम वन्यजीव विशेषज्ञ संस्थान से कराया जाए अध्ययन

    13 hours ago

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    गोंडा में घाघरा और सरयू नदी के तटीय इलाकों में मगरमच्छों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अब गोंडा सदर भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) गोंडा एवं बहराइच को पत्र सौंपकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है। विधायक ने मांग की है कि अगली गर्मियों से पहले 'टीएसए इंडिया' (TSA India) जैसे सक्षम वन्यजीव विशेषज्ञ संस्थान से मगरमच्छों की आबादी और उनके व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। इसका उद्देश्य हमलों के सटीक कारणों का पता लगाना और आवश्यकता पड़ने पर मगरमच्छों को अन्यत्र स्थानांतरित करना है। सुरक्षा उपायों के तहत, नदी के संवेदनशील घाटों पर तत्काल चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही, मई से अगस्त के बीच वन विभाग की नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष के नियमों के तहत, मगरमच्छ हमलों में जान गंवाने वाले सभी मृतकों के आश्रितों को शीघ्र आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने की भी मांग की गई है। तटीय गांवों में सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। मई से अगस्त का समय मगरमच्छों के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इस दौरान नदी में पानी का स्तर कम रहता है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे अकेले स्नान करने, पशु चराने या बच्चों को खेलने न भेजें। अत्यंत आवश्यक होने पर समूह में और लाठी-डंडों के साथ ही जाएं। इसके अतिरिक्त, एक महत्वपूर्ण भ्रांति को दूर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल इंसानों के लिए बिल्कुल खतरनाक नहीं होते हैं। वे केवल मछलियों का सेवन करते हैं। लुप्तप्राय घड़ियाल हमारी नदियों की धरोहर हैं, इसलिए उनसे भयभीत होने या उन्हें नुकसान पहुंचाने की आवश्यकता नहीं है। जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस पूरे मामले पर वन विभाग की कार्रवाई होने तक लगातार नजर रखी जाएगी। हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने इस संकट की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
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