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    गांजा बरामदगी मामले में कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध माना:उन्नाव में रिमांड मेमो में खामियों के चलते युवक रिहा

    8 hours ago

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    उन्नाव में गांजा बरामदगी के एक मामले में गिरफ्तार युवक को न्यायालय से राहत मिली है। बीते रविवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिमांड मेमो में गंभीर त्रुटियां पाते हुए गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया, जिसके बाद युवक को रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, 22 फरवरी 2024 को एसआई लक्ष्मी नारायण द्विवेदी और सुभाष चंद्र, हेड कांस्टेबल जितेंद्र तथा लोकेंद्र पुलिस बल के साथ संदिग्ध व्यक्ति व वाहन चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान गंगाबैराज रोड पर प्रखर जी महाराज मोड़ के पास से शुक्लागंज निवासी विजय अवस्थी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया कि उसके कब्जे से चार किलोग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ था। इस संबंध में आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। रविवार होने के कारण ग्राम न्यायालय हसनगंज के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक गुप्ता रिमांड ड्यूटी पर थे। न्यायालय का ध्यान आकर्षित अभियुक्त पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज सिंह चंदेल ने रिमांड मेमो, फर्द बरामदगी और चालानी रिपोर्ट में कई खामियों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को अवैध बताते हुए रिमांड मेमो निरस्त करने की मांग की। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने पहले पैसों की मांग की और न देने पर एनकाउंटर की धमकी दी, जिसके बाद युवक को फर्जी मुकदमे में फंसाया गया। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के दौरान कई प्रक्रियागत कमियां सामने आईं। फर्द बरामदगी रिपोर्ट में परिवारीजनों को सूचना देने वाले कॉलम में केवल "गंगाघाट" लिखा गया था, जबकि स्पष्ट विवरण नहीं था। जहां अभियुक्त के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, वहां हस्ताक्षर नहीं पाए गए। गिरफ्तारी को अवैध माना बरामद माल का नमूना भी नहीं लिया गया था। इसके अतिरिक्त, गिरफ्तारी और बरामदगी का समय भी आपस में मेल नहीं खा रहा था। इन गंभीर खामियों को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की गिरफ्तारी को अवैध माना और रिमांड मेमो को निरस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, पुलिस को युवक को सम्मानपूर्वक घर छोड़ना पड़ा।
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