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    गंज गांव को डूब क्षेत्र घोषित करने की मांग:कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद धरने पर बैठे, 7 दिन का अल्टीमेटम दिया

    8 hours ago

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    महोबा में भारतीय हलधर किसान यूनियन ने अर्जुन सहायक परियोजना से प्रभावित गंज गांव को पूर्ण रूप से डूब क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे। यह विरोध प्रदर्शन अर्जुन सहायक परियोजना और कबरई बांध से जुड़ा है, जिसके कारण गंज गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बांध की जल भराव क्षमता बढ़ने से गांव की लगभग 85 प्रतिशत कृषि भूमि पहले ही जलमग्न हो चुकी है। किसानों के अनुसार, पूर्व में हुए तीन सर्वेक्षणों में पूरे गांव को डूब क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके चलते सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों को नए निर्माण कार्य करने से भी रोक दिया था। हालांकि, अब विभाग अपने पूर्व के रुख से पलट रहा है और वर्तमान में केवल 15 प्रतिशत हिस्से को ही डूब क्षेत्र में मान रहा है, जिसे किसान सरासर नाइंसाफी बता रहे हैं। यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार ने प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रशासन कुंभकर्णीय नींद में सोया हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों के पास खेती की जमीन ही नहीं बची है, तो वे अपने बच्चों का भरण-पोषण कैसे करेंगे? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियां भी विभाग द्वारा दबाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि अब घर की महिलाएं भी अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री, राज्यपाल और जल शक्ति मंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उनकी मुख्य मांग है कि पूरे गंज गांव को डूब क्षेत्र घोषित किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। किसानों ने दोहराया है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। तो भारतीय हलधर किसान यूनियन जिला कलेक्ट्रेट परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर देगी। किसानों ने साफ कर दिया है कि जय जवान-जय किसान के नारे के साथ वे अपने हक की लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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