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    गलती से कर्मचारी की मौत पर राज्य उत्तरदायी : हाईकोर्ट:मुआवजे की याचिका स्वीकार, राज्य उनके ‘जीवन’ के लिए जिम्मेदार

    5 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कर्मचारी की गलती के परिणामस्वरूप दूसरे कर्मचारी की मृत्यु होती है तो इसके लिए राज्य को उत्तरदायी माना जाएगा। राज्य के कर्मचारी कभी-कभी खतरनाक कर्तव्यों का पालन इस विश्वास के साथ करते हैं कि राज्य उनके ‘जीवन’ के लिए जिम्मेदार होगा। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने सोनभद्र निवासी सरिता देवी की पति की मौत पर सही मुआवजे की मांग में दाखिल याचिका स्वीकार कर ली है। बिजली कर्मी की पोल से गिरकर मौत का मामला रेलवे रेणुकूट में बिजली की मरम्मत कर रहे याची के पति की पोल से गिरकर मृत्यु हो गई थी।पावर शक डाउन नहीं किया गया जिससे करंट लगा।उन्हें 10.16 लाख रुपये मुआवजा मिला था। उन्होंने 60 लाख रुपये मुआवजे की मांग थी। याची के पति सीनियर टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल) थे और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) ईस्ट सेंट्रल रेलवे रेनुकूट के अधीन नियुक्त थे। आठ अप्रैल 2023 को सुबह लगभग 7:30 बजे रेनुकूट मुख्य कॉलोनी में बिजली की कटौती की सूचना मिली। उन्हें सुबह फाल्ट ठीक करने के लिए निर्देशित किया गया। सहयोगी विनोद सिंह के साथ पेट्रोलिंग के दौरान उन्होंने पावर हाउस के पास जले फ्यूज की पहचान की। दस्ताने और हेलमेट के साथ खंभे पर चढ़ने लगे। कारकों" व सबूतों को ध्यान नहीं दिया सहयोगी ने नीचे सीढ़ी सुरक्षित की। करंट लगने से विनोद जोशी लगभग 9:45 बजे खंभे से गिर गए। हिण्डालको अस्पताल ले जाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। एफआइआर दर्ज करवा कर पोस्टमार्टम करवाया गया। याची के अनुसार सुनवाई का कोई अवसर प्रदान किए बिना संबंधित प्राधिकरण ने 10,16,700 रुपये मुआवजा निर्धारित किया लेकिन "संबंधित कारकों" व सबूतों को ध्यान में नहीं रखा। शव परीक्षण रिपोर्ट से स्पष्ट है कि विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही थी, क्योंकि 11 केवी एचटी लाइन का शटडाउन नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हुई इसलिए राज्य उत्तरदायी है। प्रतिवादियों के अधिवक्ता ने स्वीकृत मुआवजे को उचित बताया, हालांकि शव परीक्षण रिपोर्ट का विरोध नहीं किया। रेलवे ने कहा, विभाग केवल 1923 के अधिनियम के तहत निर्धारित मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है और क्षतिपूर्ति की किसी भी वृद्धि के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने वर्तमान मामले को आयुक्त के पास भेजते हुए कहा कि वह याची को सबूत/दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी करे। मुआवजे व क्षतिपूर्ति की राशि को नए सिरे से निर्धारित कर एक महीने के भीतर भुगतान किया जाएगा। मुआवजा और क्षतिपूर्ति भुगतान 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ होगा जो दुर्घटना तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक की गणना की जाएगी। इस राशि में पूर्व में भुगतान की गई राशि 10,16,700 लाख घटा दी जाएगी। उपरोक्त सभी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्रस्तुत करने की तिथि से चार महीने के भीतर पूरा की जाएगी। एक लाख रुपए अतिरिक्त दिये जायेंगे।
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