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    Gandhi Sagar अभयारण्य में छोड़ी गई बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB-2, MP में संख्या 56 पार

    13 hours ago

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    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई एक मादा चीता को छोड़ा और इसे राज्य की समृद्ध जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण करार दिया। इसके साथ ही नीमच जिले के इस अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जिनमें दो नर एवं दो मादा चीते शामिल हैं जबकि शावकों से इतर मध्यप्रदेश में अब 56 से अधिक चीते हो गए हैं। चीता परियोजना के तीसरे चरण में आज गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ी गई मादा चीता को सीसीबी-2 नाम दिया गया है।यादव ने कहा, इसके साथ ही हम इस परियोजना की पूर्णता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यहां गत वर्ष छोड़े गए चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई चीता परियोजना सफलता के नए मानदंड स्थापित कर रहा है, वहीं मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनर्स्थापित करने का कार्य निरंतर जारी है।उन्होंने कहा, हम पहले से ही टाइगर स्टेट हैं, अब घड़ियाल, गिद्ध और चीते के साथ चीता स्टेट के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं और प्रदेश में गजराजों की संख्या भी लगभग 100 हो गई है। उन्होंने कहा कि इनसे मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छोड़ी गई मादा चीते के साथ ही मध्यप्रदेश में अब 56 से अधिक चीते हो गए हैं। उन्होंने कहा, यह मध्यप्रदेश की समृद्ध जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार चीता संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा, यह केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि एशिया की भी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परियोजना है। एक समय एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे और मध्यप्रदेश में भी इनकी उपस्थिति समाप्त हो गई थी। आज यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश की धरती पर एक बार फिर चीते स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि चीता संरक्षण की यह उपलब्धि वन्यजीवों के प्रति जियो और जीने दो की भावना को दर्शाती है और यह हमारे वन विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
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