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    गोरखपुर में चौथे रोजे पर इबादत की रौनक बढ़ी:नमाज-तरावीह में उमड़ी भीड़, जरूरतमंदों की मदद का पैगाम

    9 hours ago

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    गोरखपुर में माह-ए-रमजान के चौथे रोजे पर इबादत का माहौल और गहरा हो गया। रोजेदारों ने रोजा रखकर अल्लाह के हुक्म की तामील की। मस्जिदों और घरों में दिनभर कुरआन-ए-पाक की तिलावत, नमाज और दुरूद-ओ-सलाम का सिलसिला जारी रहा। मस्जिदों में बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग नमाज अदा करते नजर आए, वहीं घरों में महिलाएं इबादत के साथ सहरी और इफ्तार की तैयारी में जुटी रहीं। इफ्तार के समय दस्तरख्वान पर लोग एक साथ बैठकर रोजा खोलते दिखे। तरावीह की नमाज में भी अच्छी भीड़ रही और कई मस्जिदों में कुरआन के कई पारे मुकम्मल हो चुके हैं। बाजारों में बढ़ी खरीदारी रमजान के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सेवई, खजूर, टोपी, तस्बीह, इत्र और इस्लामी किताबों की खरीदारी तेज हो गई है। दर्जियों की दुकानों पर ईद के कपड़े सिलवाने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है, जिससे बाजार गुलजार नजर आ रहा है। कुरआन पूरी दुनिया के लिए हिदायत मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि रमजान के मुकद्दस महीने में ही कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ और इसका पढ़ना, सुनना व देखना इबादत है। उन्होंने कहा कि कुरआन पूरी दुनिया के लिए हिदायत है और इसके बताए उसूलों पर चलकर अमन कायम किया जा सकता है। कुरआन 23 साल में अलग-अलग मौकों पर नाजिल हुआ और इसका एक-एक लफ्ज सुरक्षित है। रोजा जरूरतमंदों की मदद की सीख देता है मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज निजामी ने कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। रोजा भूख-प्यास का एहसास कराकर इंसान को जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि इस महीने में गरीब और जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद करनी चाहिए ताकि समाज में भाईचारा मजबूत हो। रमजान हेल्पलाइन नंबरों पर उलमा किराम ने कुरआन और हदीस की रोशनी में रोजे से जुड़े सवालों के जवाब दिए। बताया गया कि अगर गर्भवती महिला को रोजे से सेहत को नुकसान का खतरा हो तो वह रोजा छोड़ सकती है और बाद में कजा करना जरूरी है। रोजे की हालत में आंख में दवा डालना या जख्म पर मरहम लगाना जायज है, जबकि इंजेक्शन के जरिए खून निकलने पर वुजू टूट जाता है।
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