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    गोरखपुर शिक्षक MLC चुनाव का रिजल्ट आज:देवेंद्र प्रताप और विनय तिवारी की प्रतिष्ठा दांव पर, संजयन त्रिपाठी पर टिकी नजरें

    5 hours ago

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    गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की मतगणना का परिणाम मंगलवार देर रात तक आने की संभावना है। इस चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबले के साथ कई नेताओं की साख भी दांव पर लगी है। भाजपा से टिकट की तैयारी कर रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी ने टिकट नहीं मिलने पर सपा का दामन थाम लिया था। उनके सपा से चुनाव लड़ने के कारण दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। इस चुनाव के नतीजे पर भाजपा के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी और भाजपा व शर्मा गुट के पदाधिकारियों की नजरें टिकी हैं। नतीजा इन नेताओं के राजनीतिक प्रभाव और आगे की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। संजयन त्रिपाठी के सपा में जाने से बढ़ा मुकाबला भाजपा से इस चुनाव की तैयारी कर रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी को जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। उनके सपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने चुनाव में जोर लगा दिया। वहीं, भाजपा ने भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा से जुड़े रहे किसी नेता का सपा में जाकर चुनाव जीतना पार्टी के लिए राजनीतिक झटका माना जा सकता है। इसी वजह से चुनाव के नतीजे को दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। विनय शंकर तिवारी की भूमिका पर भी नजर पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी डॉ. संजयन त्रिपाठी को सपा में शामिल कराने के लिए पहुंचे थे। ऐसे में संजयन की जीत से विनय शंकर तिवारी का राजनीतिक कद बढ़ सकता है। वहीं, हार की स्थिति में ब्राह्मणों के सपा के साथ जाने को लेकर बन रही चर्चाओं को झटका लग सकता है। भाजपा से बगावत करने वाले पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के लिए भी यह चुनाव अहम माना जा रहा है। नतीजे से यह भी पता चलेगा कि क्षेत्र में इन नेताओं का प्रभाव कितना रहा। देवेंद्र प्रताप सिंह ने संजयन के लिए लगाया जोर सबसे ज्यादा नजरें भाजपा के स्नातक क्षेत्र के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री के मंच पर बैठने को लेकर हुए कथित अपमान के बाद से उनकी भाजपा से नाराजगी की चर्चा रही है। शुरुआत में उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए मतदान के दिन अपमान का बदला लेने के लिए वोट देने की अपील की थी। मतदान से दो दिन पहले वह खुद भी चुनाव प्रचार में उतर गए। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का दायरा एक जैसा होने के कारण उनके समर्थन से संजयन त्रिपाठी को फायदा मिलने की चर्चा है। देवेंद्र प्रताप सिंह और उनके समर्थकों ने संजयन को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाई। ऐसे में चुनाव का नतीजा देवेंद्र प्रताप सिंह के राजनीतिक प्रभाव और भाजपा के साथ उनके रिश्तों की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और शर्मा गुट के पदाधिकारियों की भी परीक्षा इस चुनाव के नतीजे से भाजपा और शर्मा गुट के कई पदाधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी। दोनों दलों के लिए यह चुनाव अपने समर्थकों को एकजुट रखने और शिक्षक मतदाताओं के बीच प्रभाव साबित करने का मौका है। मंगलवार देर रात तक आने वाले परिणाम पर सभी की नजरें रहेंगी। जीत-हार से न सिर्फ पार्टी की रणनीति का आकलन होगा, बल्कि चुनाव में सक्रिय रहे नेताओं के राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा होगी।
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