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    घर में नमाज पढ़ी, नाराजगी में लिखा...मकान बिकाऊ है:बरेली में जुमा की नमाज का विरोध, गांव वाले बोले-हम पलायन करने को मजबूर हैं

    14 hours ago

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    बरेली में एक गांव के लोग पलायन करने का ऐलान किया है। इसके लिए उन्होंने अपने-अपने घरों के बाहर मकान बिकाऊ है स्लोगन भी लिख दिया है। यह कदम गांव में जुमा की नमाज के विरोध में उठाया है। घरों में जुमा की सामूहिक नमाज होने से नाराज हिंदू आबादी की शिकायत पर पुलिस सक्रिय हो गई है। घर में नमाज पढ़ने वालों को ऐसा करने से मना किया है। पलायन की बात कहने वालों को भी समझाया गया है। तनाव की हालत को देखते हुए गांव में पुलिस तैनात है। हिंदू आबादी ने गाली-गलौज, मारपीट का आरोप लगाया है। हिंदू संगठन के पदाधिकारयों की सक्रियता से मामला संवेनशील हो गया है। यह मामला बिशारतगंज थाना के मोहम्मदगंज गांव का है। पहले यह 3 तस्वीर देखिए… अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… गांव में मस्जिद नहीं, घराें में जुमा की नमाज मोहम्मदगंज गांव की आबादी करीब 1200 है। यहां 65 फीसदी हिंदू और 35 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। गांव में कोई मस्जिद नहीं है। पहले लोग जुमा की नमाज के लिए आसपास के गांव जाया करते थे। फिर गांव में ही एक घर में नमाज अदा करनी शुरू कर दी। हर शुक्रवार को जुमा की नमाज एक एक घर में पढ़ने लगे। जिस घर में नमाज हो रही है, वह गांव के ही हसीन नाम के व्यक्ति का है। हसीन दूसरे घर में रहते हैं। जिस मकान में नमाज होती है, वह अलग है। इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। यहां काफी समय से शुक्रवार को जुमा की नमाज होती है। गांव के लोग इकट्‌ठा होकर नजाम पढ़ते हैं। एक बार इसकी शिकायत हुई थी। तब पुलिस ने नमाज पढ़ने वाले लोगों का चालान कर दिया था। उसके बाद नमाज बंद कर दी गई थी। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग हाईकोर्ट चले गए। अब फिर से नमाज पढ़ने लगे। इसी बात को विरोध हो गया। अभी इस मामले में हाईकोर्ट से किसी तरह का कोई आदेश भी नहीं हुआ है। हिंदू आबादी का ऐतराज, नई परंपरा का विरोध हिंदू आबादी को इसी बात पर ऐतराज है। उनकी शिकायत है कि घर में नमाज पढ़ने की नई परंपरा डाली जा रही है। पहले ऐसा नहीं होता था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो कोई मस्जिद है और न ही मंदिर। ऐसे में घरों को इबादतगाह में बदलना एक नई परंपरा की शुरुआत है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसी से नाराज होकर हिंदू आबादी ने विरोध में गांव से पलायन करने का ऐलान कर दिया। इसके लिए बाकायदा अपने-अपने घरों के बाहर चॉक से मकान बिकाऊ है लिख डाला। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस वहां पहुंची। दोनों के पक्ष के लोगों को समझाया गया। गाली-गलौज करते हैं, गंदा पानी डालते हैं हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें परेशान करते हैं। घरों में इकट्ठे होकर सामूहिक नमाज अदा करते हैं। हिंदुओं के साथ में गाली-गलौज करते हैं। उन पर गंदा पानी भी डालते हैं। फायरिंग का भी आरोप लगाया है। हिंदू समुदाय का आरोप है कि उन्हें अपने ही घर में बेगाना महसूस कराया जा रहा है। हिंदुओं के कहना है कि हर जुमा को लोग इक्कठे होकर नमाज अदा करते हैं। पुलिस की ओर से नमाज के लिए मना किया गया है। जानिए पिछली बार क्या हुआ था… पहली बार एक महीने पहले 16 जनवरी को यह मामला सामने आया था। मोहम्मदपुर के इसी घर में जुमा की नमाज अदा करने का वीडियो सामने आया था। नमाज के दौरान किसी ने वह वीडियो बनाकर पुलिस तक पहुंचा दिया। अगले दिन पुलिस ने वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर 12 लोगों का चालान किया। कुछ दिन तक उस घर में नमाज नहीं हुई, अब पिछले शुक्रवार 13 फरवरी को उसी घर में फिर से नमाज हुई। किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।नजाम पढ़े जाने से गांव के हिंदू समुदाय में नाराजगी है। गांव की महिलाओं ने बताया, बात सिर्फ नमाज की नहीं है। नमाज के बहाने भीड़ जुटती है और फिर हमारे साथ गाली-गलौज की जाती है। हमें डराया जाता है कि अभी तो कुछ नहीं, हमारी सरकार आने दो, फिर तुम सबको यहां से खदेड़ देंगे। हिंदुओं का आरोप है कि विरोध करने पर मुस्लिम पक्ष की ओर से फायरिंग भी की गई, जिससे गांव में दहशत है। तनाव इतना बढ़ा कि हिंदू परिवारों ने एकजुट होकर अपने घरों के बाहर 'मकान बिकाऊ है' लिख दिया है। देखते ही देखते पूरा गांव 'पलायन' की सुर्खियों में आ गया। सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के पदाधिकारी भी गांव पहुंच गए। इससे मामला और संवेदनशील हो गया। बजरंग दल के लोगों का कहना है कि ई तरह से सामूहिक नमाज अदा करना गलत है। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही संभालने की कोशिश की। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने सुबह गांव पहुंचकर मकान बिकाऊ है को हटवा दिया। मुस्लिम पक्ष का तर्क, ‘इबादत करना गुनाह नहीं' इस पूरे मामले पर मुस्लिम समुदाय के लोगों का तर्क बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि गांव में इबादत के लिए कोई सार्वजनिक स्थान या मस्जिद नहीं है। ऐसे में अपने निजी घरों में खुदा की इबादत करना कोई अपराध नहीं है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार, हिंदू समुदाय बेवजह छोटी बातों को तूल दे रहा है और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। फायरिंग के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार और साजिश बताया है। गांव के प्रधान मोहम्मद आरिफ ने कहा कि मस्जिद है, इसीलिए घर में नमाज पढ़ी जाती है। इस पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए। गांव में पुलिस…नमाज पढ़ने वालों को हिदायत बिशारतगंज थाना प्रभारी (SO) सतीश कुमार ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया, गांव में सामूहिक नमाज को लेकर विवाद हुआ था। जिन लोगों ने बिना अनुमति सामूहिक नमाज पढ़ी थी, उन्हें सख्त हिदायत देकर समझा दिया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।” ---------------------- इसी गांव में पहले हुए विववाद की यह खबर भी पढ़ें--- खाली मकान में जुमा की नमाज...12 अरेस्ट:बरेली में गांव वालों ने वीडियो बनाकर पुलिस को भेजा, मौके पर नमाज पढ़ते मिले लोगों को पकड़ा बरेली में एक खाली पड़े मकान में बिना अनुमति के सामूहिक नमाज पढ़ने और अस्थायी मदरसा चलाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया। उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई है। यह मामला बिशारतगंज थाना के मोहम्मदगंज गांव का है। शुक्रवार को हुई नमाज की शिकायत पर रविवार को पुलिस ने कार्रवाई की है। पूरी खबर पढ़ें
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