Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    घुसपैठिये चाहे पाकिस्तानी हों या बांग्लादेशी...Amit Shah की नीति एकदम स्पष्ट है...देखिये J&K में 150 बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ क्या हुआ?

    3 hours ago

    1

    0

    जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों और पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें आपने अक्सर सुनी होंगी लेकिन अब पहली बार वहां बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ तगड़ा एक्शन हुआ है। हम आपको बता दें कि अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 बांग्लादेशी नागरिकों को घाटी से बाहर भेज दिया है। सोमवार को इन्हें भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीनगर से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा पहुंचाया गया, जहां आगे की प्रक्रिया के लिए इन्हें सीमा सुरक्षा बल को सौंपा गया। अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की जा रही है जिनकी पहचान जांच में बांग्लादेशी नागरिकों के तौर पर हुई और जिनके पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज नहीं पाए गए।इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस की ओर से किए गए सर्वे में कश्मीर घाटी में करीब 600 बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध रूप से रहने की पहचान की गई है। इनमें से पहले चरण में 150 लोगों को बाहर भेजा गया है और अधिकारियों के अनुसार दूसरे समूह को भी 7 अक्टूबर को डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया पूरी किये जाने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।दरअसल, जम्मू-कश्मीर में अवैध विदेशी नागरिकों का सवाल केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब दस्तावेजी पहचान, जनसांख्यिकीय बदलाव और सीमावर्ती इलाके की सुरक्षा से भी जुड़ता जा रहा है। अगस्त में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में 7,656 रोहिंग्या और 504 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई थी। इनमें रोहिंग्याओं की बड़ी संख्या जम्मू संभाग में बताई गई, जबकि कश्मीर संभाग में भी उनकी मौजूदगी दर्ज की गई।यही वजह है कि जम्मू क्षेत्र में रोहिंग्या बस्तियां भी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की निगाह में हैं। सितंबर में जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्या परिवारों की झुग्गियों को खाली कराने की कार्रवाई सामने आई थी। प्रशासन ने जमीन मालिकों को नोटिस देकर अवैध रूप से बनी झुग्गियों को हटाने को कहा, जिसके बाद कई परिवारों ने अपने ठिकाने खाली करने शुरू कर दिए। बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता लगातार बढ़ रही है। कुछ महीने पहले रामबन के बनिहाल इलाके में 21 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को वैध पहचान और यात्रा दस्तावेज नहीं मिलने पर हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की। यह समूह जम्मू से कश्मीर की ओर जा रहा था और नियमित जांच के दौरान दस्तावेज मांगे जाने पर मामला सामने आया।देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में यह चिंता इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यह एक सीमावर्ती और लंबे समय से आतंकवाद तथा संगठित अपराध से प्रभावित क्षेत्र रहा है। ऐसे में किसी भी विदेशी नागरिक का बिना वैध दस्तावेज के लंबे समय तक रहना, पहचान छिपाना या संदिग्ध नेटवर्क के संपर्क में आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सामान्य कानून-व्यवस्था के मुकाबले कहीं बड़ी चुनौती बन सकता है। सरकारी स्तर पर भी इस चिंता को गंभीरता से लिया जा रहा है। मोदी सरकार की ओर से गठित जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी समिति ने जम्मू-कश्मीर में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और उससे जुड़े प्रशासनिक एवं सुरक्षा पहलुओं की जानकारी जुटाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जम्मू और सांबा समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी दर्ज की गई है। समिति ने जम्मू के रोहिंग्या बस्ती वाले इलाके का भी दौरा किया था।बहरहाल, देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। जम्मू-कश्मीर में 150 बांग्लादेशी नागरिकों की पहली बड़ी डिपोर्टेशन कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली कोर्ट से जमानत, CJP प्रोटेस्ट में मारपीट का है आरोप
    Next Article
    ECI मार्च पर विपक्ष पर बरसे Shivraj Singh Chouhan, कहा- चुनाव सुधारों का विरोध बंद करे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment