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    घुसपैठियों की अब खैर नहीं, Amit Shah Bengal Border जा रहे हैं, Bangladeshi अधिकारी भागे भागे भारत आ रहे हैं

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    बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और सीमा पार अपराधों के खिलाफ भारत का रुख अब पहले से कहीं अधिक कठोर दिखाई दे रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह स्वयं चार और पांच जून को त्रिपुरा पहुंचकर भारत बांग्लादेश सीमा की स्थिति का जायजा लेने जा रहे हैं। वह सीमा सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करेंगे तथा सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात को परखेंगे। उधर, पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने भी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक अभियान छेड़ रखा है, जिसकी चारों ओर चर्चा हो रही है।दक्षिण 24 परगना जिले के कुलतली क्षेत्र में पुलिस ने 18 और बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिनमें छह बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग अवैध रूप से सीमा पार कर इलाके में रह रहे हैं। पूछताछ में सभी लोगों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के निवासी हैं और एजेंटों की मदद से सीमा की तारबंदी पार कर भारत में घुसे थे। बताया जा रहा है कि यह लोग पिछले तीन से साढ़े तीन वर्षों से कुलतली इलाके में रह रहे थे तथा कुछ लोग स्थानीय ईंट भट्टों में काम भी कर रहे थे। अब इनके दस्तावेजों और पहचान की गहन जांच की जा रही है, जिसके बाद इन्हें होल्डिंग सेंटर भेजकर बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सत्ता में आने के तुरंत बाद जिस सख्त नीति की घोषणा की थी, अब उसका असर जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। तेइस मई को राज्य के गृह एवं पर्वतीय विभाग की विदेशी शाखा ने सभी जिलों को आदेश जारी कर अवैध विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद राज्य में "पकडो, हिरासत में लो और वापस भेजो" नीति को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है। सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर चौबीस परगना से लेकर उत्तर बंगाल के सिलीगुडी तक प्रशासन ने ऐसे केंद्र स्थापित कर दिये हैं। कुलतली अब इस विस्तृत अभियान का नया केंद्र बन गया है।हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में पिछले सात महीनों में दूसरी बार बांग्लादेशी घुसपैठियों के पलायन की स्थिति बनी है। विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान भी अनेक अवैध घुसपैठिए राज्य छोड़कर भागने लगे थे। अब होल्डिंग सेंटरों की स्थापना और लगातार चल रही कार्रवाई के बाद फिर से अवैध रूप से रह रहे लोगों में भय का माहौल है। खबरों के अनुसार, 29 मई तक तीन सौ अस्सी से अधिक बांग्लादेशी नागरिक विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में रखे जा चुके थे। पहचान सत्यापन के बाद उन्हें बांग्लादेश भेजा जा रहा है। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अब भारत की भूमि पर अवैध घुसपैठ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का त्रिपुरा दौरा भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। त्रिपुरा की आठ सौ छप्पन किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है और यह राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। अवैध घुसपैठ, तस्करी, मानव तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों को रोकना यहां हमेशा से चुनौती रहा है। हालांकि अधिकांश सीमा पर तारबंदी की जा चुकी है, फिर भी कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के कारण कुछ हिस्से अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में अमित शाह का स्वयं सीमा पर पहुंचना यह संदेश देता है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतने वाली।सीमा सुरक्षा बल ने भी माना है कि बांग्लादेश में पिछले वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम और अस्थिरता के बाद सीमा पर निगरानी कई गुना बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने अब "स्मार्ट बॉर्डर परियोजना" के अंतर्गत ड्रोन, रडार, अत्याधुनिक कैमरे और नई तकनीकों से लैस अभेद्य सुरक्षा तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया है। अमित शाह ने स्पष्ट कहा है कि त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल की सरकारें अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं और सीमा सुरक्षा बल को स्थानीय प्रशासन, पुलिस तथा पंचायतों के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा।इसी बीच आठ से ग्यारह जून के बीच नई दिल्ली में भारत और बांग्लादेश के बीच महानिदेशक स्तर की सीमा वार्ता भी होने जा रही है। इस बैठक में सीमा पर घुसपैठ, तस्करी, हथियारों की आवाजाही, मानव तस्करी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। भारत इस बैठक में सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करेगा। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस संबंध में प्रभासाक्षी के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था कि दोनों देश इस मुद्दे पर चर्चा करने जा रहे हैं।देखा जाये तो पश्चिम बंगाल में चल रहा अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्षों से अवैध घुसपैठ के कारण जनसंख्या संतुलन, कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता रहा है। अब जब सरकार ने स्पष्ट नीति के साथ कार्रवाई शुरू की है, तो इसका स्वागत होना चाहिए। शुभेन्दु अधिकारी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और अब राज्य में भाजपा सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई से यह साफ है कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।बहरहाल, अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों को अब यह समझ लेना चाहिए कि देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। जो लोग एजेंटों के बहकावे में आकर सीमा पार कर रहे हैं, उन्हें सख्त चेतावनी है कि भारत अब पहले जैसा नहीं रहा। हर घुसपैठिए की पहचान होगी, हिरासत होगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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