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    घोड़ों को गर्मी से बचाने के लिए स्पेशल इंतजाम:प्रयागराज पुलिस लाइन अस्तबल में लगे है कूलर व पंखें, हीटवेव के लिए विशेष डाइट

    3 hours ago

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    प्रयागराज पुलिस लाइन में तैनात घोड़ों के लिए गर्मी से बचाव के लिए खास इंतजाम किया गया है। अलग‑अलग बाड़े वाले अस्तबल में हर घोड़े के ऊपर पंखा व कूलर लगाया गया है। करीब 10 कूलर लगाकर ठंडी हवा का इंतजाम किया गया है। गर्म हवाओं से बचाने के लिए अस्तबल की छत और खिड़कियों पर बोरों की चादर लगाकर वातावरण को ठंडा रखा जा रहा है। दो तस्वीरें देखिए… इन घोड़ों के लिए पानी और गर्मी से बचाने वाले विशेष आहार की भी व्यवस्था की गई है, ताकि तेज धूप और लू के दौरान भी ये फिट रहें। सुबह और शाम को अस्तबल की बाड़ों की धुलाई के बाद घोड़ों को नहलाया जाता है, ताकि उनकी देह ठंडी रहे और गर्मी का असर कम से कम सहन करना पड़े। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर ये घोड़े भीड़–नियंत्रण, दंगा नियंत्रण और कुंभ मेले जैसी बड़ी घटनाओं में बिना किसी दिक्कत के काम कर सकें। खास नस्ल के 16 घोड़े, हर एक में अलग खासियत आर.आई. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनके अस्तबल में कुल 16 घोड़े हैं, जिनमें देसी, काठियावाड़ी और 'थरो-ब्रेड' जैसी नस्लें शामिल हैं। बेहतर इंतजामों के कारण घोड़ों को लू लगने का खतरा कम है, फिर भी आपात स्थिति के लिए डॉक्टर और ड्रिप, सीरप व इंजेक्शन जैसी दवाइयां तैयार रहती हैं। घोड़ों के प्रशिक्षण की बात करें तो, सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच उन्हें राइडिंग स्कूल में ले जाया जाता है। इसके अलावा, कई घोड़े शहर में पेट्रोलिंग (गश्त) के लिए तैनात रहते हैं, जिससे उनकी नियमित वर्जिश भी हो जाती है। सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी घोड़ा लंबे समय तक बंधा न रहे। पुलिस लाइन में रखे गए इन घोड़ों में मृणाल, मार्शल, धवाल, उज्जवल, दामिनी शामिल हैं, जो तेज, स्वस्थ और काम की दृष्टि से बेहद काबिल माने जाती हैं। इन घोड़ों का बाजार मूल्य तीन लाख रुपये से ऊपर बताया जाता है। कुंभ मेले के समय भीड़ को नियंत्रित करने, दंगा ग्रस्त इलाकों में भीड़ को तोड़ने और संवेदनशील जगहों पर पुलिस की गश्त में इन्हीं घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। गर्मी से बचाव के ये इंतजाम सिर्फ घोड़ों की सेहत के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी हैं कि प्रयागराज में चरम गर्मी के दिनों में भी पुलिस की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से निर्भर रहे। शहर में अप्रैल में ही 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा तापमान पिछले कई सालों के गर्मी के रिकॉर्ड को तोड़ चुका है। संगम तट से लेकर गलियों तक सन्नाटा पसरा है, क्योंकि लोग घर से बाहर निकलते ही हाथ पैर झुलसने जैसा महसूस करते हैं। इस भीषण गर्मी में जहां इंसान परेशान है, वहीं सड़क पर रहने वाले जानवर भी गर्मी की चपेट में हैं।
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