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    हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक के बेटे की रिहाई बरकरार रखी:जमानत शर्त रद्द, पुलिस को दोबारा कार्रवाई की छूट

    2 hours ago

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    यूपी की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बसपा के पूर्व विधायक अजय कुमार उर्फ पंकज के पुत्र अमन उर्फ मिक्की की गिरफ्तारी के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी अमन उर्फ मिक्की की बिना शर्त रिहाई को बरकरार रखा है। साथ ही, निचली अदालत द्वारा लगाई गई जमानत की शर्त को निरस्त कर दिया। लेकिन हाईकोर्ट की खंड पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी तकनीकी आधार पर अवैध घोषित होने के बावजूद पुलिस को कानून के तहत दोबारा कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता है। मामला जालौन के कोंच कोतवाली के जवाहर नगर निवासी बसपा के पूर्व विधायक रहे अजय कुमार उर्फ पंकज के बेटे अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की से जुड़ा है, जिसकी ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। इससे पहले 12 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश में गंभीर खामियां पाते हुए उन्हें निरस्त कर दिया था। अदालत ने पाया था कि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़े गए थे, जो कानून का उल्लंघन है। इसी आधार पर याची को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, आदेश के अनुपालन में जालौन के विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हैबियस कॉर्पस रिट के तहत रिहाई का आदेश सीधे जेल अधीक्षक को संबोधित होता है, न कि किसी न्यायिक अधिकारी को। ऐसे में निचली अदालत द्वारा जमानत की शर्त लगाना विधिक रूप से गलत है। खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब गिरफ्तारी और रिमांड पहले ही अवैध घोषित किए जा चुके हैं, तो आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में मानना ही गलत है। इसलिए जमानत या निजी मुचलका मांगना पूरी तरह अनुचित है। अदालत ने 13 मार्च 2026 के विशेष न्यायाधीश के आदेश को निरस्त करते हुए यह भी कहा कि आरोपी को बिना किसी शर्त के रिहा माना जाएगा और उससे लिया गया मुचलका स्वतः समाप्त हो जाएगा। साथ ही, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि “चूंकि गिरफ्तारी तकनीकी आधार पर अवैध घोषित हुई है, इसलिए पुलिस को कानून के अनुसार आगे कार्रवाई करने की स्वतंत्रता रहेगी।” इसका सीधा अर्थ है कि आरोपी को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि पुलिस विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करती है, तो भविष्य में उसके खिलाफ दोबारा कार्रवाई संभव है।
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