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    हर्षा बोलीं- मुझे फॉरेन फंडिंग हुई, इसे साबित करें:वरना महाराज जी मनहानि का एक करोड़ रुपए दें, जब रिकॉर्ड निकलते हैं तो डरावने होते हैं

    2 hours ago

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    उज्जैन में संन्यास को लेकर उठे विवाद के बाद स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने संतों के आरोपों का जवाब दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने कहा- महाराज जी, मैं अभी उज्जैन में हूं। इससे पहले मैं 2019 से उत्तराखंड में थी। क्या आपको पता है मैं वहां क्या कर रही थी? अपना काम छोड़कर वहां क्यों थी? मैं कौन सी साधना, कौन सी तपस्या और किस गुरु के सानिध्य में कर रही थी? कौन कितने साल तपस्या करके यहां संत बना है। किसी को कुछ नहीं पता है, महाराज जी। लेकिन कुछ लोगों के जब रिकॉर्ड निकलते हैं, तो वो रिकॉर्ड काफी डरावने होते हैं। अब यह मत कह दीजिएगा कि हर्षा रिझारिया ने संतों का अपमान किया। महाराज जी आप यह साबित कर दीजिए कि मुझे विदेश से फंडिंग हो रही है। अगर आप गलत साबित हुए, तो आपको मुझे मानहानि के रूप में 1 करोड़ रुपए देना होगा। बता दें कि महाकुंभ 2024 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया ने हाल ही में सन्यास लिया है वह अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। हालांकि, उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज जताया था। यूनिवर्सिटी के एक संत भाग रहे थे तब महाराज जी कहां थे शुक्रवार को सामने आए वीडियो में उन्होंने कहा कि हर्षा रिझारिया लेंस लगाए। हर्षा रिझारिया मेकअप कर ले। हर्षा रिझारिया नजर का चश्मा लगाए, जो डॉक्टर ने दिया है और जो धूप में काला हो जाता है, क्योंकि मुझे दिन की रोशनी से आंखों में दिक्कत हो रही है। हर्षा रिझारिया ने फैशनेबल चश्मा लगा लिया है, मतलब हर्षा रिझारिया अपनी सेहत का ख़याल आपकी सोच के हिसाब से करे, है न पूजनीय महाराज जी? अगर इस लड़की ने सन्यास लिया है तो इसे 10 वर्ष तक हिमालय पर तपस्या करनी पड़ेगी। महाराज जी मैंने तब विरोध किया, जब अशोक खेराज जैसे लोग अरेस्ट हुए। उनके वीडियो सामने आए। आपने तब हंगामा किया, जब किसी यूनिवर्सिटी के एक संत भागते-भागते फिर रहे थे। यौन शोषण के मामले में जब लड़कियां थाने तक पहुंच गई थीं। तब आपने विरोध किया था क्या? मुझे याद नहीं आ रहा महाराज जी। महाराज जी बताएं, मैंने कहां अपनी सीमाएं लांघीं? आज आप एक लड़की का विरोध कर रहे हैं कि ये संत कैसे बन गई। संत मैं अपने जीवन में बनी हूं। अपने जीवन का मैंने यहां पिंडदान किया है। आपको कुछ गलतफहमी हुई है। मेरा विरोध करने से पहले मेरे बारे में जानिए तो। मैंने कब कहा कि मैं सन्यासी हूं, मैं साध्वी हूं? प्रयागराज कुंभ से पहले या बाद में, मैंने तो मीडिया के जरिये पचासों बार इससे इनकार किया है। मुझे लगता है कि एक समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति वही होता है, जो किसी पर आरोप लगाने से पहले पूरी जानकारी हासिल करता है। आप बार-बार कह रहे हैं कि मैंने प्रयागराज कुंभ को खराब किया। मैंने जाकर किसका अपमान किया? मैंने किसका विरोध किया? किसे अपमानित किया? कहां अपनी सीमाएं लांघीं? कहां अपने संस्कारों से हटी? मैं सनातन धर्म में मैं पैदा हुई हूं महाराज जी। ब्राह्मण परिवार, वशिष्ठ गोत्र में मेरा जन्म हुआ। अब मेरा गोत्र अच्युत है। जो सच्चा साधु-संत का होता है। फॉरेन फंडिंग को साबित करें, मैं मीडिया के सामने बैंक डिटेल्स रखूंगी जहां तक फॉरेन फंडिंग की बात है। महाराज जी आप यह साबित कर दीजिए कि मुझे विदेश से फंडिंग हो रही है। भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के लिए। मैं अपनी पूरी बैंक डिटेल्स, प्रयागराज महाकुंभ से अब तक की सारी जानकारी, मीडिया और देश के सामने रखने को तैयार हूं। अगर यह साबित हो जाता है कि मुझे विदेश से या देश के भीतर से भी लाखों-करोड़ों की कोई बड़ी फंडिंग मिली है। तो मैं अपनी पूरी संपत्ति आपके चरणों में अर्पित कर दूंगी। लेकिन अगर आप गलत साबित हुए, तो आपको मुझे मानहानि के रूप में 1 करोड़ रुपए देना होगा। आरोप गलत हुए तो मुझे एक करोड़ रुपए दें क्योंकि अपमान आपने जरूरत से ज्यादा किया है। पहला आरोप, मैंने दो बार सन्यास लिया, जो पूरी तरह गलत है। दूसरा आरोप आपने नचनिया-कुदनिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो एक लड़की के लिए अपमानजनक है। तीसरा फॉरेन फंडिंग का झूठा आरोप लगया और चौथा कि मैं महाकुंभ को खराब करने आई हूं। भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही हूं। आप ऐसे आरोप लगाकर उन लोगों के मन में भी भ्रम और नफरत पैदा कर रहे हैं, जो संतों में ईश्वर को देखते हैं। अब आप बताइए, मैं कब मीडिया के सामने अपनी बैंक डिटेल्स रखूं? कब पूरी सच्चाई बताऊं? ये खबर भी पढ़ें अनिलानंद ने कहा-900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकतीं महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो। यहां पढ़ें पूरी खबर…
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