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    हीटवेव में बच्चों को निर्जलीकरण से बचाएं:डॉ. सिद्धार्थ मणि दूबे बोले- ज्यादा स्तनपान कराएं, ओआरएस और तरल पदार्थ देते रहें

    8 hours ago

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    बलिया में भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सकों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। महिला जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. सिद्धार्थ मणि दूबे ने कहा कि इस मौसम में बच्चों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाना सबसे जरूरी है। समय रहते पर्याप्त तरल पदार्थ दिए जाएं तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। डॉ. दूबे ने बताया कि इन दिनों तापमान 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हीटवेव का सबसे अधिक असर नवजात और छोटे बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि माताएं नवजात शिशुओं को अधिक से अधिक स्तनपान कराएं, क्योंकि यही उन्हें हाइड्रेटेड रखने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। बढ़ रहे हैं उल्टी-दस्त और डायरिया के मामले उन्होंने सलाह दी कि बड़े बच्चों को दिनभर चावल का मांड़, मूंग की दाल का पानी, नारियल पानी और ओआरएस का घोल नियमित अंतराल पर पिलाते रहें। इससे शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी नहीं होगी। डॉ. सिद्धार्थ मणि दूबे ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों में उल्टी, दस्त और बुखार के मामलों में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि शनिवार को ओपीडी में 70 से अधिक ऐसे बच्चों का उपचार किया गया, जो उल्टी, दस्त और डायरिया से पीड़ित थे। इनमें कई बच्चे निर्जलीकरण की स्थिति में अस्पताल पहुंचे थे। लक्षण दिखते ही शुरू करें ओआरएस उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को दस्त, उल्टी या बुखार हो तो तुरंत ओआरएस देना शुरू करें और बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक को दिखाएं। ओआरएस का घोल पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही तैयार करें और नियमित रूप से बच्चे को पिलाते रहें। डॉ. दूबे ने कहा कि यदि बच्चे को निर्जलीकरण से बचा लिया जाए तो उसका इलाज सीएचसी, पीएचसी या जिला अस्पताल में आसानी से हो सकता है। सबसे बड़ी समस्या तब होती है, जब बच्चा अत्यधिक निर्जलित होकर सुस्त पड़ जाता है। इसलिए समय रहते ओआरएस, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ देना ही सबसे प्रभावी बचाव है।
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