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    लखनऊ में 10 हजार अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग:2 साल पहले LDA ने हाईकोर्ट में खुद बताया था, लेकिन 15 मौतों के बाद जागे जिम्मेदार

    6 hours ago

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    लखनऊ में 10 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण दर्ज हैं। यह दावा खुद एलडीए ने 2 साल पहले हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में किया था। इसके बावजूद वर्षों तक कार्रवाई कागजों तक सीमित रही और अब अलीगंज अग्निकांड में 15 मौतों के बाद जिम्मेदार जागे हैं। एलडीए ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया था कि राजधानी में 10,380 अवैध निर्माण दर्ज हैं। लेकिन, इतने बड़े आंकड़े के बावजूद अधिकांश मामलों में ध्वस्तीकरण या प्रभावी कार्रवाई केवल कागजी है। हुसैनगंज होटल केस : रेजिडेंशियल का नक्शा पास कराया, बना दिया होटल अवैध निर्माण से जुड़े कई मामलों में याचिकाकर्ता रहे अधिवक्ता बीके सिंह हुसैनगंज के छितवापुर इलाके में संचालित सेवन वंडर होटल का उदाहरण देते हैं। उनके अनुसार, यह मामला वर्ष 2014 से जुड़ा है। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने होटल के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। बीके सिंह बताते हैं कि करीब तीन साल तक मामला अदालत में चला और वर्ष 2018 में होटल को सील कर दिया गया। हालांकि, ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद एलडीए अधिकारियों ने शपथपत्र के आधार पर सील खोल दी। इसके लिए यह शर्त रखी गई थी कि भवन का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए किया जाएगा। अधिवक्ता का कहना है कि इसके बावजूद वहां होटल और बैंक्वेट हॉल का संचालन जारी रहा। बाद में वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने दोबारा ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। वर्ष 2023 और 2024 में भी अदालत ने आदेशों का पालन न होने पर नाराजगी जताई। LDA ने अदालत को बताया कि ध्वस्तीकरण से जुड़ी फाइल जूनियर इंजीनियर के पास चली गई और वापस नहीं आई। बाद में फोटोस्टेट के आधार पर नई फाइल तैयार करनी पड़ी। LDA की भवन निर्माण और विकास उप-नियम, 2025 में कुछ परिस्थितियों में सेटबैक से जुड़े सीमित उल्लंघनों की कंपाउंडिंग का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां फायर एनओसी अनिवार्य है, वहां बिना एनओसी, बिना पार्किंग, कॉमन एरिया पर निर्माण या अन्य गंभीर उल्लंघनों वाले भवन कंपाउंडिंग के पात्र नहीं हैं। यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है यदि नियम इतने स्पष्ट हैं, तो राजधानी में बड़ी संख्या में रिहायशी भवनों का व्यावसायिक उपयोग कैसे होता रहा? रेजिडेंशियल से कमर्शियल बनने का रास्ता अधिवक्ता बीके सिंह का आरोप है कि कंपाउंडिंग व्यवस्था और कमजोर प्रवर्तन का लाभ उठाकर वर्षों से बड़ी संख्या में रिहायशी भवनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया। उनके अनुसार राजधानी में ऐसे भवनों में- होटल, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, निजी कार्यालय संचालित हो रहे हैं, जबकि उनकी मूल स्वीकृति आवासीय उपयोग के लिए थी। क्या केवल NOC पर्याप्त है? फायर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एनओसी जारी होना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि भवन में निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, सुरक्षा उपकरण कार्यशील हैं या नहीं और समय-समय पर निरीक्षण तथा फायर ऑडिट हो रहे हैं या नहीं। ------------------------------ संबंधित खबर भी पढ़िए- लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतें, बिल्डिंग ढहाई जाएगी : यूपी के 48 कोचिंग सेंटर सील; अखिलेश बोले- 1 करोड़ मुआवजा मिले लखनऊ की 2 मंजिला इमारत में आग लगने की घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार सुबह 11 बजे हादसे की जांच के लिए SIT और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने इमारत की जांच की। SIT में IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं। SIT यहां से बैगों में भरकर सबूत ले गई। शवों का 7 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चला। शव घरवालों को सौंप दिए गए। पश्चिम बंगाल की अनामिका (30) का शव देखकर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची मां बेहोश हो गईं। जांच में पता चला है कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध थी। 2016 में गिराने का आदेश हुआ था। बाद में आदेश निरस्त कर दिया गया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया- बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया है। बिल्डिंग पर बुलडोजर चलेगा। (पूरी खबर पढ़िए)
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