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    इंडियन आइडल वैभव गुप्ता बोले- पापा ने बनाया सिंगर:3 साल की उम्र में मां नहीं रहीं, पहली बार बाथरूम में गाया तो पापा ने टैलेंट देखा

    1 hour ago

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    ‘"4 साल का था, पहली बार बाथरूम में गाना गा रहा था। तब पापा ने गाते हुए सुना। पापा ने कहा- फिर से सुनाओ। उन्होंने मेरा टैलेंट देखा। मुझे शर्म लगी, लेकिन मेरे पापा को लगा कि मेरे अंदर कुछ टैलेंट है। पहली बार स्कूल के कम्पटीशन में ‘तुझे सब है पता, मेरी मां…’ गाना गाया और जीत गया। जब मैं तीन साल का था, तो मेरी मां नहीं रहीं, लेकिन मेरे चाचा और पापा ने कभी कमी महसूस नहीं होने दी। इसी वजह से 6 बार लगातार रिजेक्ट होने के बाद इंडियन आइडल जीता और अब धुरंधर में 'मन अटक्या’ गाना रणवीर सिंह के लिए गाकर अपना सपना पूरा किया।" ये कहना है कानपुर के वैभव गुप्ता का, जिन्होंने साल 2024 में इंडियन आइडल 14 का खिताब जीता। अब उनके पास बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में गाने गाने की लाइन लग गई है। दैनिक भास्कर ने उनसे इस सफलता पर बात की, पढ़िए- तेरे मस्त-मस्त दो नैन… गाते पापा ने सुना था वैभव ने बताया कि पहली बार जब मैं चार साल का था, तो बाथरूम में बच्चों की तरह उस समय के गानों को गाने का शौक था। तभी मैं “दबंग” का गाना “तेरे मस्त-मस्त दो नैन” गा रहा था। तभी मेरे पापा ने गाना सुन लिया। जब मैं बाथरूम से बाहर निकला, तो उन्होंने कहा- फिर से गाओ। मुझे शर्म आई, लेकिन उस दिन के बाद से पापा को लगा कि गाना गाने में मैं आगे जा सकता हूं। स्कूल में संगीत प्रतियोगिता हुई। मैंने वहां ‘तुझे सब है पता, मेरी मां…’ गाना गाया। मैं प्रतियोगिता में फर्स्ट आया। इसके बाद पापा ने मेरे स्कूल टीचर से बात की। मैं स्कूल में ही संगीत सीखने लगा। मेरे संगीत टीचर आनंद गुप्ता ने पापा से कहा कि इस बच्चे को तो गॉड गिफ्ट है, इसके सुर अपने आप ही बहुत अच्छे से लगते हैं। पापा ने मुझे सिखाने के लिए और आगे बढ़ाया। इंडियन आइडल के ऑडिशन में 6 बार रिजेक्ट हुआ वैभव ने बताया- फिर मैं शहर के कई कम्पटीशन में हिस्सा लेने लगा। कई जगह जीता भी, लेकिन मेरे पापा और चाचा ने कभी प्रेशर क्रिएट नहीं किया। बस वो चाहते थे कि मैं सीखता रहूं। जब मुझे लगा कि इंडियन आइडल में जाना है, तो मैंने 2014 में पहली बार ऑडिशन दिया। लगातार 6 बार रिजेक्ट हुआ, हताश हो गया। इसके अलावा दो बार सारेगामा पा में भी रिजेक्ट हुआ। इसके बाद साल 2024 आया। फिर मैंने पापा से कहा कि आप मेरे साथ चलोगे, लेकिन पापा भी हताश हो गए थे। उन्होंने कहा कि पता नहीं होगा या नहीं, फिर बोले कि तुम अकेले ही जाओ। मैं लखनऊ गया, मैंने गाया और मैं सिलेक्ट हो गया। फिर कानपुर ने ही मुझे इंडियन आइडल में जीत दिलाई। हमेशा लगा, मां और उनकी दुआएं मेरे साथ हैं तीन साल की उम्र में मां नहीं रहीं, लेकिन मैं कभी रोया नहीं। बस हमेशा लगा कि वो मेरे साथ हैं। उनकी दुआएं मेरे साथ हैं। मेरा परिवार और कानपुर मेरे साथ है। जिसका नतीजा ये रहा कि आज मैं इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मैं बहुत जल्द एक EP लॉन्च कर रहा हूं, जिसमें मेरी खुद की म्यूजिक होगी और मेरी आवाज होगी। उसमें मेरे 6 गाने होंगे। मेरा सपना था कि मैं रणवीर के लिए गाना गाऊं। अब मेरा सपना है कि मैं शाहरुख खान के लिए गाना गाऊं। चाहे सैड सॉन्ग हो या कोई तड़कता-भड़कता गाना… सब गा सकता हूं मैंने अपनी आवाज को इस तरह से तैयार किया है कि मैं हर तरह के गीत गा सकूं। चाहे सैड सॉन्ग हो या कोई तड़कता-भड़कता गाना। बस मुझे लगता है कि मेरी मेहनत का फल मुझे मिल गया है। ऐसा लगता है कि एक फनकार को सुनने वाले मिल गए हैं। इंडियन आइडल के वो मूवमेंट,चाहे श्रेया दीदी हों या अन्य लोग जब ऐसे लोगों के सामने गाना, सीखना एक बड़ा बदलाव था। इससे मेरी मेहनत और बढ़ गई।
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