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    ईरान का स्टॉक फुल, किम जोंग ने दी घातक मिसाइलें, टेंशन में ट्रंप-नेतन्याहू?

    3 hours from now

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    ईरान के पास इतनी ताकतवर मिसाइलें कहां से आई? यह वो सवाल है जिसने पेंटागन से लेकर इजराइली डिफेंस फोर्स तक के होश उड़ा दिए हैं। ईरान के हालिया हमलों ने साबित कर दिया है कि दुनिया के सबसे आधुनिक कहे जाने वाले इजराइल अमेरिका एयर डिफेंस सिस्टम भी उसकी मिसाइलों के आगे बौने साबित हो रहे हैं। अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है और इसके तार जुड़ रहे हैं दुनिया के सबसे रहस्यमई देश उत्तर कोरिया से। अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी न्यूज़ डिजिटल की एक रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रूस वेक्टोल का दावा है कि ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा या तो सीधे तौर पर उत्तर कोरिया से खरीदा गया है या उनमें उत्तर कोरियाई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। एक्सपर्ट ब्रूस बेटोल जिन्होंने ईरान और उत्तर कोरिया की रणनीतिक साझेदारी पर किताब भी लिखी है। उन्होंने दावा किया है कि डियागो गार्सिया सैन्य ठिकाने पर ईरान ने जिस मिसाइल से हमला किया वो दरअसल उत्तर कोरियाई मुसुदान मिसाइल थी। हथियारों की डील का सच। ईरान ने उत्तर कोरिया से कुल 19 मुसूदान मिसाइलें खरीदी थी। इन मिसाइलों की खेप साल 2005 में ही ईरान पहुंच गई थी। यह मिसाइल लंबी दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है। जिससे अमेरिकी बेस भी सुरक्षित नहीं है। ब्रूस बैक्टोल और एंथोनी सोल्स की किताब रॉक एलाइज के मुताबिक ईरान और उत्तर कोरिया के बीच ये सैन्य गठबंधन दशकों पुराना है। अमेरिका को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि ईरान के पास इतनी मारक क्षमता वाली मिसाइलें हो सकती हैं। लेकिन अब साफ है उत्तर कोरिया ने गुपचुप तरीके से ईरान को मिसाइल हब बना दिया है। एयर डिफेंस सिस्टम क्यों हुए फेल? विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया मिसाइलें अपनी गति और ट्रेजिकरी के कारण पकड़ी जानी मुश्किल होती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी और इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम ईरान के बैलेस्टिक मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाई। ईरान और उत्तर कोरिया के इस जुगलबंदी ने मिडिल ईस्ट के युद्ध को और भी खतरनाक बना दिया है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस खुलासे के बाद उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाएगा या फिर ईरान की यह मिसाइलें अमेरिका के दबदबे को ही खत्म कर देंगी? 28 फरवरी 2026 यह वो तारीख है जब मिडिल ईस्ट की धरती एक बार फिर लहूलुहान हो गई। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सेनाएं ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम पर ईरान पर बारूद बरसा रही हैं। लेकिन इस जंग के पीछे जो दावे किए गए अब उनकी कलई खुलने लगी है। क्या दुनिया को एक और इराक युद्ध जैसी त्रासदी की ओर धकेला जा रहा है? आखिर क्यों परमाणु एजेंसी के पूर्व प्रमुख ने ट्रंप को विनाशकारी करार दिया है? मौत का खौफनाक आंकड़ा। आंकड़ों की बाजीगारी के बीच इंसानी जिंदगियां दम तोड़ रही हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक हमलों में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं एक अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन का दावा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 3500 से ज्यादा मौतें जिनमें 250 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं। पूरी दुनिया में ट्रंप और नेतन्याहू की थूथू हो रही है और अब उनके मित्र देश भी उनके खूनखराबे के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। मोहम्मद अलबरदाई की चेतावनी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अल बबरदाई ने वियाईना से पूरी दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने ट्रंप के कदमों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर इन पागलपन भरे फैसलों को नहीं रोका गया तो पूरा मिडिल ईस्ट आग का गोला बन जाएगा। हाल ही में ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में के सैन्य अड्डे पर दो मिसाइल दागी थीं। द वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक, इनमें से एक मिसाइल रास्ते में ही फेल हो गई, दूसरे को अमेरिकी युद्धपोत ने रोकने की कोशिश की। दोनों ही मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं। विशेषज्ञ के अनुसार, हमले में इस्तेमाल मिसाइल Musudan थी, जिसे ईरान ने साल 2005 में नॉर्थ कोरिया से खरीदा था।इसे भी पढ़ें: ईरान के सीने में घुसकर अमेरिकी सेना का जांबाज रेस्क्यू! फिल्मी अंदाज़ में बचाए गए दो पायलटईरान ने खुद विकसित की तकनीक1990 के दशक में नॉर्थ कोरिया ने बड़ी संख्या में No Dong मिसाइल ईरान को दी थीं। इसके बाद ईरान ने अपने यहां इनकी तकनीक पर काम शुरू किया और आगे Emad और Ghadr जैसी मिसाइल भी विकसित की। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास फिलहाल 1,000 किलोमीटर तक मार करने वाले शॉर्ट-रेंज और 3,000 किलोमीटर तक पहुंचने वाले मीडियम-रेज मिसाइल है। लंबी दूरी के मिसाइल पर भी काम जारी है।
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