Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया

    17 hours ago

    1

    0

    इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका के जरिए सऊदी अरब को भेजा है। हालांकि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इसका विरोध किया है। उन्हें डर है कि इजराइली सेना के इसमें शामिल होने से सऊदी अरब की नाराज हो सकती है। हारेत्ज के मुताबिक इजराइल के हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने में दिलचस्पी होने की 3 अहम वजहें हैं… 1. सऊदी के साथ संबंध मजबूत करना सऊदी अरब यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इजराइल को उम्मीद है कि सऊदी अरब की मदद करने से दोनों के संबंध मजबूत होंगे। इससे आगे चलकर दोनों के बीच राजनयिक संबंध बनाने का मौका भी बन सकता है। 2. ईरान को कमजोर करना ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संबंध हैं। सऊदी अरब और अमेरिका आरोप लगाते रहे हैं कि ईरान हूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है। इससे हूती ड्रोन और मिसाइलों से हमले करने में सक्षम हुए हैं। इसी वजह से हूती इजराइल और मिडिल ईस्ट कई देशों के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब के आसपास जहाजों पर हमले किए हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजराइल को भी निशाना बनाया है। इसलिए इजराइल इस सैन्य अभियान में शामिल होकर हूतियों को कमजोर करना चाहता है। 3. सऊदी के साथ सैन्य तालमेल बढ़ाना सऊदी लंबे समय से हूतियों को सुरक्षा चुनौती मानता है। इजराइल सऊदी की मदद कर क्षेत्र की एक बड़ी अरब शक्ति के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसके खतरे भी हैं। सऊदी अरब से जुड़े सैन्य अभियानों में इजराइली सेना की भागीदारी पर देश के अंदर और पूरे अरब जगत में विरोध हो सकता है। सऊदी से राजनयिक संबंध बेहतर करना चाहता है इजराइल ईरान का विरोध करने के बावजूद सऊदी अरब और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। ट्रम्प कई बार सऊदी अरब से इजराइल के साथ दोस्ती करने की अपील कर चुके हैं। इसके लिए अमेरिका ने अब्राहम समझौते का रास्ता भी सुझाया है। 2020 में इस समझौते के तहत UAE और बहरीन समेत कई अरब देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंध सामान्य किए थे। हालांकि सऊदी अरब का कहना है कि वह इजराइल से रिश्ते तभी ठीक करेगा, जब फिलिस्तीन मुद्दे का सामाधान होगा। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा: अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील
    Next Article
    इजराइल में पाकिस्तानी पायलटों की नो-एंट्री:नेतन्याहू सरकार ने बैन लगाया; राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के क्रू पर सख्ती की

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment