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    इक्टू ने 4 श्रम संहिताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया:रायबरेली में ऐक्टू ने मोदी सरकार की चार श्रम संहिताओं के खिलाफ मनाया काला दिवस

    3 hours ago

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    ट्रेड यूनियन महासंघों के राष्ट्रीय आह्वान पर रायबरेली में ऐक्टू ने मोदी सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं के विरोध में काला दिवस मनाया। ऐक्टू कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर जिला कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर उन्होंने चार श्रम संहिताओं को वापस लेने और पुराने कानूनों को बहाल करने की जोरदार मांग की। ऐक्टू प्रदेश अध्यक्ष विजय ने बताया कि इन संहिताओं को 21 नवंबर को अधिसूचित किया गया था और 1 अप्रैल से ये लागू कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन संहिताओं को मजदूरों के हित में साबित करने के लिए प्रचार कर रही है, जबकि असलियत इसके बिल्कुल विपरीत है। विद्रोही ने बताया कि पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गई ये चार संहिताएं मजदूरों को मालिकों के गुलाम बना देंगी और उनका अस्तित्व खतरे में डाल देंगी। संविधान और लोकतंत्र पर हमला विद्रोही ने कहा कि ये संहिताएं ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय जनता के संघर्ष और कुर्बानियों से हासिल पुराने श्रम कानूनों को खत्म करती हैं। इसलिए इन्हें लागू करना देश के संविधान पर हमला है और मोदी सरकार की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये संहिताएं केवल “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” को बढ़ावा देने के लिए लाई गई हैं, जिससे कॉर्पोरेटों का चरम मुनाफा सुनिश्चित होगा। निजीकरण और विदेशी निवेश पर रोक की मांग कामरेड विद्रोही ने कहा कि कोयला, रेल, डिफेंस, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का निजीकरण जारी है। बीमा क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति दी गई है, जिससे विदेशी कंपनियों को घरेलू बीमा प्रणाली पर नियंत्रण मिलेगा। इसके साथ ही बिजली और कृषि क्षेत्र में भी अडानी- अंबानी जैसे पूंजीपतियों के लिए कानून बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सभी अधिनियमों और विधेयकों को रद्द करने की मांग की। मजदूरों और आम जनता के लिए खतरे का संकेत किसान सभा अध्यक्ष फूल चंद्र मौर्या ने कहा कि ये कानून केवल अडानी-अंबानी के लिए हैं, आम जनता और मजदूरों के लिए नहीं। गरीबों को अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने लेबर कोड, 12 घंटे का श्रम, पुलिस राज, बुलडोजर राज और सामाजिक विभाजन को मजदूरों की नियति बताया। ज्ञापन सौंपकर मांगे पूरी सुरक्षा और सुधार प्रदर्शन के अंत में ऐक्टू कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। इसमें चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, पुराने कानून बहाल करने, मनरेगा और बिजली निजीकरण रोकने, आशा और मिड डे मील कर्मियों को कर्मचारी दर्जा देने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कानून बनाने और घरेलू कामगार महिलाओं के लिए कल्याणकारी कानून लागू करने की मांग की गई। प्रदर्शन में ऐक्टू कार्यवाहक अध्यक्ष कृष्ण आत्मा शर्मा, गुड्डू सोनकर और इंद्र बहादुर यादव ने भी अपने विचार रखे और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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