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    इन 3 बड़े शिया देशों पर क्यों हमले कर रहा ईरान? भारत के मुसलमान भी हैरान

    3 hours from now

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    अमेरिका और इजराइल की ओर से हमले के बाद से ही ईरान ने मिडिल ईस्ट के उन देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान की ओर से इन देशों पर हमले अब भी बदस्तूर जारी हैं। ईरान ने जिन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं उनके पास भी मजबूत सैन्य ताकत है। हालांकि इन देशों ने अभी तक ईरान पर पलटकर हमला नहीं किया। इन देशों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई, क़तर, तुर्की और अज़रबैजान शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इनमें कई शिया देश भी शामिल हैं। जहां शिया मेजॉरिटी में हैं। वहीं ईरान की पहचान एक शिया लीडर देश के तौर पर होती रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर ईरान सुन्नी देशों के साथ-साथ शिया मुल्कों को भी क्यों कर रहा है टारगेट?इसे भी पढ़ें: Iran Israel US War Day 26 Updates: ट्रंप का बातचीत का दावा, इजरायल पर मचा रहा कोहराम!ईरान लगातार बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। यह हमले अमेरिका इजराइल द्वारा ईरान पर की गई जवाबी कार्रवाही के बाद बढ़े तनाव का हिस्सा है। इन हमलों के कारण खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है और स्थानीय वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गई हैं। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अली अल सलेम और मीना अल अहमदी रिफाइनरी जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों ही देशों के एयर डिफेंस सिस्टम अपने सायरन मोड पर हैं। बहरीन की बात करें तो बहरीन एक शिया बहु बाहुली देश है। वहां करीब 65% आबादी शिया है। शियाओं के वहां पर बहुसंख्यक होने के बावजूद उन पर सुन्नी अल खलीफा परिवार का शासन है। यह देश अमेरिका का एक नजदीकी अलय है। पिछले कुछ सालों से इसके संबंध इजराइल के साथ भी काफी मजबूत हुए हैं। कुवैत की बात करें तो यहां पर करीब आधी आबादी शियाओं की है। कुवैत भी अमेरिका और इजराइल का करीबी पार्टनर है। हालांकि कुवैत के वर्तमान राजा शेख मिसाल अल अहमद अल जाबेर अल सबा सुन्नी हैं। इसे भी पढ़ें: कश्मीर के लोगों का पूरा पैसा लेकर भाग गया ईरान! पूरा भारत हैरानतीसरा शिया देश है अज़र बैजान जहां पर ईरान जमकर हमले कर चुका है। अज़र-बैजान के नक्शीवान स्वायत्त गणराज में ईरानी सीमा से ड्रोन हमले किए गए। जिससे नक्शीवान, हवाई अड्डे और नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। आपको बताते चल अज़रान के रिश्ते अमेरिका से कुछ खास मजबूत नहीं है। लेकिन अज़र-बैजान इजराइल का एक ऑलवेदर फ्रेंड है। इजराइल अज़र-बैजान से गैस और तेल खरीदता है। वहीं अज़र-बैजान इजराइल से हथियार लेता है। एक शिया देश होने के बावजूद अज़रबैजान के संबंध ईरान से सीमा विवाद के चलते तनावपूर्ण रहे हैं। दरअसल इन शिया देशों पर ईरान इसलिए हमले कर रहा है क्योंकि यह देश अमेरिका और इजराइल के मजबूत अलय हैं। वहीं भारत की बात करें तो भारत में भी ठीक-ठाक शिया आबादी रहती है। यह ज्यादातर यूपी, नॉर्थ कश्मीर और लद्दाख में है। भारत में शियाओं का एक बड़ा तबका इस युद्ध में ईरान को समर्थन करता हुआ नजर आया है। हालांकि इस युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं। 
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