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    India MEA Briefing: Trump के नर्क वाले बयान पर India ने दी प्रतिक्रिया, Nepal Customs Duty विवाद पर भी आया भारत का जवाब

    3 hours from now

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    भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गयी आपत्तिजनक टिप्पणी पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने बड़ी संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने इस विषय में सामने आयी रिपोर्टें देखी हैं और फिलहाल वह इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहेंगे। हम आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप  ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें भारत और चीन को नरक जैसे अपमानजनक शब्दों में संदर्भित किया गया था। इस पोस्ट में आव्रजन व्यवस्था और रोजगार से जुड़ी कई विवादास्पद बातें कही गयी थीं। इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गयी। कांग्रेस पार्टी ने इसे अत्यंत अपमानजनक बताते हुए सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की। पार्टी ने कहा कि यह टिप्पणी हर भारतीय की भावना को आहत करती है और प्रधानमंत्री को इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष उठाना चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया बेहद संतुलित रही। विदेश मंत्रालय ने इस मामले में कोई तीखी टिप्पणी करने से परहेज किया और केवल इतना कहा कि उसने रिपोर्ट देखी है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से संभालना चाहता है।ब्रीफिंग में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी जानकारी दी गयी। प्रवक्ता ने बताया कि भारत की एक टीम हाल ही में वॉशिंगटन गयी थी, जहां इस समझौते को लेकर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यह वार्ता रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश एक संतुलित तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच सौ अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।इसे भी पढ़ें: India Energy Supply | ऊर्जा संकट के बीच पड़ोसी देशों का सहारा बना भारत: बांग्लादेश को भेजा 22,000 टन डीजल, मालदीव-सेशेल्स ने भी मांगी मददइसके अलावा, भारत ने फ्रांस के साथ अपने संबंधों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अब भारतीय नागरिकों को फ्रांस के हवाई अड्डों से केवल हवाई मार्ग से पारगमन के लिए ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी। यह व्यवस्था दस अप्रैल 2026 से लागू हो गयी है। प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बातचीत का परिणाम है। इससे दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन में आसानी होगी और आपसी संबंध और मजबूत होंगे।इसके अलावा, भारत ने जापान द्वारा रक्षा उपकरण और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़ी नीतियों की समीक्षा का भी स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और जापान के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग उनके विशेष रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार है। दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमत हैं।नेपाल से जुड़े एक अन्य प्रश्न पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाये हुए है। उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार भारत से खरीदे गये सामान पर सीमा शुल्क से जुड़े पहले से लागू प्रावधानों को सख्ती से लागू कर रही है, जिसके तहत एक निश्चित सीमा से अधिक मूल्य के सामान पर शुल्क लिया जा रहा है। प्रवक्ता के अनुसार नेपाल का यह कदम अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि रोजमर्रा के उपयोग के लिये व्यक्तिगत सामान लेकर आने वाले आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। रणधीर जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि भारत इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नेपाल के साथ सक्रिय रूप से संवाद बनाये हुए है, ताकि दोनों देशों के बीच सहज आवागमन और पारंपरिक संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमीर जेलेंस्की द्वारा भारत के प्रधानमंत्री से रूस के राष्ट्रपति को युद्ध रोकने के लिये कहने की अपील संबंधी सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने भारत की सुस्पष्ट और संतुलित नीति दोहरायी। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। जायसवाल ने एक बार फिर दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आग्रह किया।समग्र रूप से देखा जाए तो विदेश मंत्रालय की इस ब्रीफिंग में भारत ने एक ओर जहां संवेदनशील मुद्दों पर संयम और संतुलन का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की।
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