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    India और Vietnam के बीच गहराएंगे रक्षा और आर्थिक संबंध, Indo-Pacific क्षेत्र में बदलेगा खेल

    4 hours from now

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    भारत और वियतनाम के संबंधों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के तहत वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम आज भारत के तीन दिवसीय दौरे पर पहुँचे। इस यात्रा की शुरुआत उन्होंने बिहार के गयाजी पहुंचकर की, जहां बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा दोनों देशों के गहरे और पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। राष्ट्रपति तो लाम ने अपने प्रवास के दौरान बोध गया का भी दौरा किया, जो वह पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने महाबोधि मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। यह यात्रा केवल कूटनीतिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी दर्शाती है। इससे पहले वर्ष 2011 में उन्होंने वियतनाम के बाक निन्ह स्थित फाट तिक पगोडा में बोधि वृक्ष का रोपण किया था, जो बोध गया से ही ले जाया गया था।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: America को हरा चुके देश के राष्ट्रपति आ रहे हैं India, शुरू होगा China-Pakistan की घेराबंदी का नया अध्यायहम आपको बता दें कि राष्ट्रपति तो लाम, जो वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव भी हैं, हाल ही में राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद पहली बार भारत आए हैं। उनका यह दौरा सात मई तक चलेगा। छह मई को उनका राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी विस्तृत बातचीत होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी उनसे मुलाकात करेंगी और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी उनसे भेंट कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है और संबंधों को नई गति मिलेगी।हम आपको बता दें कि भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार पर मजबूत रहे हैं। वर्ष 2016 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई थी, जिसकी अब दसवीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति तो लाम की यात्रा विशेष महत्व रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी थी और विश्वास जताया था कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों की मित्रता और मजबूत होगी।हम आपको यह भी बता दें कि भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग भी तेजी से मजबूत हो रहा है, जो दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। दोनों देश दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्षधर हैं और समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग तथा सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में लगातार साझेदारी बढ़ा रहे हैं। भारत वियतनाम को रक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। इस सहयोग का व्यापक सामरिक असर यह है कि क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और दोनों देश एक दूसरे के भरोसेमंद सुरक्षा भागीदार के रूप में उभर रहे हैं। इससे इंडो पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था को भी बल मिलता है।साथ ही आर्थिक दृष्टि से भी भारत और वियतनाम के संबंध तेजी से विकसित हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार वर्ष 2016 में लगभग 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 16.46 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ही व्यापार 4.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। हम आपको बता दें कि वियतनाम से भारत को मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और कृषि उत्पादों का निर्यात होता है, जबकि भारत से वियतनाम को वस्त्र सामग्री, प्लास्टिक, औषधियां और इस्पात भेजा जाता है। इस प्रकार दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे की पूरक बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरकता दोनों देशों को प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग और उत्पादन श्रृंखला के एकीकरण की दिशा में ले जा रही है।देखा जाये तो वैश्विक स्तर पर जब कंपनियां अपने उत्पादन केंद्रों का विस्तार कर रही हैं, तब भारत और वियतनाम दोनों ही क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। निवेश के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां वियतनाम के बीस से अधिक प्रांतों और शहरों में परियोजनाएं चला रही हैं, जबकि वियतनामी कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से वस्त्र और जूता उद्योग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं उभर रही हैं। इसके अलावा डिजिटल प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत हो रही है।बहरहाल, राष्ट्रपति तो लाम की यह भारत यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने का अवसर है। यह यात्रा आने वाले समय में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग को और अधिक गहरा और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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