Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    इस्लामाबाद मीटिंग के बाद चीन का बड़ा खेल, तेहरान में सैकड़ों टन बम और मिसाइल!

    3 hours from now

    2

    0

    ईरान, अमेरिका, इजराइल जंग में अब बता दें कि चाइना की एंट्री हो गई है और इस दावे ने पूरी दुनिया को इस वक्त चौंका दिया है, हैरान कर दिया है। बता दें कि इस्लामाबाद में बातचीत हो रही है अमेरिका और ईरान के बीच में लेकिन दूसरी तरफ की जो कहानी है वो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली है। सीज फायर जरूर हुआ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान अपने हाथ में हाथ रखकर चुप बैठा रहेगा। इस टाइम को ईरान अपनी सैन्य ताकत को और भी ज्यादा मजबूत करने में जुटा हुआ है। अब जो खबर सामने आई है उसके मुताबिक युद्ध विराम के बीच ईरान खुद को और भी ज्यादा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जो खुफिया जानकारी सामने आई है उससे यह पता चला है कि चाइना अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। खुफिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया, यह भी दावा किया गया है कि ईरान सीज फायर का फायदा उठाकर विदेशी दोस्तों की मदद से अपने हथियारों का जखीरा भरना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हथियारों में आपको बता दें कि सीधे नहीं बल्कि किसी तीसरे देश के रास्ते ईरान तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है। योजना बनाई जा रही है और उस पर काम किया जा रहा है ताकि चीन की भूमिका बिल्कुल भी सामने ना आए। यानी ऊपर से न्यूट्रल रहने की बातचीत हो रही है और अंदर ही अंदर तैयारी कुछ और ही चल रही है। सूत्रों के मुताबिक बता दें कि बीजिंग सिस्टम को ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहा है। वे कंधे से दागे जाने वाले एंटी एयर मिसाइल सिस्टम भेजने की तैयारी कर रहा है। जिन्हें मैनपड्स कहा जाता है। ये ऐसे हथियार होते हैं जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। यह बताया गया कि पांच हफ्तों तक चले युद्ध में ऐसे सिस्टम नीचे उड़ने वाले अमेरिकी एयरक्राफ्ट के लिए एक बड़ा खतरा भी साबित हुए थे और इसी के जरिए उन्हें टारगेट किया गया था। और अगर सीज फायर टूटता है तो यही हथियार चाइना का यही हथियार एक बार फिर अमेरिका और इजराइल के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा। इस बीच बता दें कि एक और बड़ा दावा भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बताया गया कि हाल ही में जिस अमेरिकी F1-15 फाइटर जेट को मार गिराया था उसे एक हैंड हेल्ड हीट स्किंग मिसाइल से निशाना बनाया गया था। हालांकि बता दें कि यह साफ बिल्कुल भी नहीं हो पाया है। पुष्टि नहीं हो पाई है कि वो सिस्टम चीन में बना था या फिर नहीं। लेकिन अगर ऐसा साबित होता है तो यह बीजिंग की सीधी भागीदारी की ओर साफ-साफ इशारा करता है। दरअसल बता दें कि चीन और ईरान के बीच ये जो तकनीकी सहयोग है यह पहले से ही रहा है। यह नया नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि चीनी कंपनियां ईरान को ड्यूल यूज़ टेक्नोलॉजी देती रही है। जिससे ईरान जो है वो अपने हथियार और नेविगेशन सिस्टम को और भी ज्यादा बेहतर बना सके और यह बेहतर बनाता आया भी है। लेकिन अगर सीधे हथियार सिस्टम ट्रांसफर होता है तो यह मदद का एक बिल्कुल ही नया स्तर होगा। अब इस पूरे मामले का एक कूटनीतिक एंगल भी सामने आया है। दरअसल बता दें कि अगले महीने जो है बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात होने की उम्मीद है। ऐसा रिपोर्ट में दावा किया गया है। इसे भी पढ़ें: भारत की परमाणु सफलता पर क्या बोला चीन? चौंकी दुनियाऐसे में यह जो रिपोर्ट सामने आई है यह उस बैठक पर भी साया डाल सकती है। वाइट हाउस ने भी यह संकेत दिया है कि हाल ही में ईरान सीज फायर बातचीत के दौरान अमेरिका और चीन के बीच में एक हाई लेवल [संगीत] बातचीत हुई थी। इंटेलिजेंस से जुड़े सूत्रों का यह मानना है कि चीन इस जंग में खुलकर कूदने का जोखिम बिल्कुल भी नहीं लहना चाहता है। उसे यह पता है कि अमेरिका और जो इजराइल है यह इसके खिलाफ होगा। सीधे टक्कर में जीतना आसान नहीं है।इसे भी पढ़ें: Minab के मासूमों की तस्वीरों के जरिये Iran ने किया US पर भावनात्मक वार, वार्ता के लिए पाक पहुँचे JD Vance इसलिए बीजिंग जो है वो एक अलग ही रणनीति पर काम कर रहा है। इस वक्त ऊपर से वो न्यूट्रल रहने की कोशिश कर रहा है और अंदर ही अंदर ईरान के साथ अपने रिश्तों को वो मजबूत कर रहा है। ईरान को यह खुलकर मदद कर रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि चीन जो है वो ईरान के तेल पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में वह तेहरान को बिल्कुल भी नाराज नहीं कर सकता और खुद को उसका पक्का दोस्त भी साबित चाइना करना चाहता है। हालांकि जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसे नजरअंदाज कर दिया है। प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि चीन ने कभी भी इस लड़ाई में किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं। यानी कि इस दावे पर चीन की तरफ से रिएक्शन सामने आया है। ऐसे में आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने यह कहा और यह सनसननी फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें: US-Iran Talks से पहले चीन का बड़ा दांव, तेहरान को मिलेंगे Air Defence System, अमेरिकी रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशनचीन का यह भी कहना है कि वह एक जिम्मेदार देश है और लगातार इस जंग को खत्म करने और सीज फायर को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि शांति बनी रहे। लेकिन सवाल अब वही है कि अगर सब कुछ इतना ही साफ है तो फिर यह जो खुफिया रिपोर्ट्स सामने आई यह बार-बार चीन का नाम ही क्यों ले रही है? दरअसल बता दें कि तस्वीर अब जो है वह दो हिस्सों में बटती हुई साफ नजर आ रही है। एक तरफ रूस है जो ईरान को खुफिया जानकारी देकर उसकी मदद कर रहा है ताकि वो अमेरिका और इजराइल के जो क्राफ्ट्स हैं एयरक्राफ्ट्स हैं उन्हें टक्कर दे और दूसरी तरफ चीन का यह जो नाम जुड़ता हुआ नजर आ रहा है वो सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह भी कहा गया। यानी यह जंग अब सिर्फ ईरान और अमेरिका और इजराइलके बीच नहीं रही है। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    जना नयाकन फिल्म को बॉलीवुड से भी मिलने लगा सपोर्ट, सोनू सूद ने पोस्ट कर थालापति विजय का किया समर्थन
    Next Article
    भारत की न्यूक्लियर छलांग पर क्या बोला पाकिस्तान? हर तरफ हो रही चर्चा

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment