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    जिला कारागार में तीन दिवसीय सत्संग का समापन:सिद्धार्थनगर में अंतिम दिन भक्ति-कीर्तन से गूंजा परिसर

    7 hours ago

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    सिद्धार्थनगर जिला कारागार में तीन दिवसीय सत्संग कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हो गया। सदानंद तत्वज्ञान परमेश्वर भगवद्धाम आश्रम के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतिम दिन कारागार परिसर भक्ति-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों से गुंजायमान रहा। बंदियों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। समापन दिवस पर मुख्य प्रवचनकार आचार्य रोहित शुक्ला ने बंदियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रत्येक हृदय में विद्यमान है और उसे पहचानने की आवश्यकता है। आचार्य शुक्ला ने बताया कि जब मनुष्य अपने भीतर की भक्ति को जागृत करता है, तो उसके बंधन स्वतः समाप्त होने लगते हैं। उन्होंने सदाचार, करुणा, क्षमा और भक्ति को जीवन में अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता बाहरी नहीं, बल्कि मन की शांति में निहित होती है। तीन दिवसीय इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में महात्मा नरसिंह, रामदास, सचिन, नेपाल सिंह, कमला प्रसाद और वेदांश सहित कई अन्य संतों ने भी प्रवचन दिए। सभी ने भक्ति, साधना और आत्मविकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बंदियों को सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित किया। महिला बैरक में भी एक विशेष सत्संग का आयोजन किया गया। यहां महिमा, सुनीता, रमा और नीलम ने भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे महिला बंदियों ने भी इसमें सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान "भज मन राम चरन सुखदाई" और "राम नाम की महिमा अपरम्पार" जैसे भजनों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। बंदियों ने ध्यान, सामूहिक प्रार्थना और कीर्तन के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव किया। जेल अधीक्षक सचिन वर्मा ने बताया कि इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इनसे बंदियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। जेल अधीक्षक ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। इस अवसर पर जेलर रामसिंह यादव, डिप्टी जेलर मुकेश प्रकाश, डिप्टी जेलर अजीत चंद, प्रभारी अभिषेक कुमार पाण्डेय और शिक्षक उत्सव तिवारी सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी तथा बंदीगण उपस्थित रहे। अंतिम दिन दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक आरती के साथ सत्संग कार्यक्रम का समापन किया गया। इसके बाद बंदियों को प्रसाद वितरित किया गया और आश्रम की ओर से भक्ति ग्रंथ भी बांटे गए। पूरे आयोजन के दौरान कारागार परिसर आध्यात्मिकता और भक्ति भाव से सराबोर रहा।
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