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    जालौन में दोहरा हत्याकांड, 11 बच्चे हुए अनाथ:जमीनी विवाद में पूरा परिवार तबाह

    1 hour ago

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    जालौन के रामपुरा क्षेत्र के मिर्जापुर जागीर में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद गांव की तस्वीर अब सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसे सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। खेत की मेड़ पर शुरू हुआ विवाद अब 11 मासूम बच्चों के भविष्य, दो महिलाओं की जिंदगी और एक बुजुर्ग पिता के टूटे अस्तित्व का सवाल बन गया है। घटना के बाद गांव में सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे कई अनकहे सवाल और दर्द छिपे हैं। कैलाश और जितेंद्र की मौत के बाद सबसे बड़ा संकट उन बच्चों पर आ पड़ा है, जिन्हें शायद अभी तक यह समझ भी नहीं है कि उनके जीवन से क्या छिन गया है। एक तरफ सात बच्चों की मां रानी हैं, जिनके सामने अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई है, वहीं दूसरी ओर रश्मि हैं, जिनके चार बच्चे भी अब पिता के साए से वंचित हो गए हैं। बच्चों का भविष्य बना सबसे बड़ा सवाल गांव के लोगों के मुताबिक, दोनों परिवार पहले संयुक्त रूप से खेती करते थे, जिससे घर का खर्च किसी तरह चल जाता था। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आय का मुख्य स्रोत खत्म हो गया है और परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्कूल जाने वाले कई बच्चे अब घर की परिस्थितियों को समझते हुए चुपचाप बैठे हैं। गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, जिस उम्र में बच्चों को किताबें पकड़नी चाहिए, उस उम्र में उन्होंने खून-खराबा देख लिया। इसका असर उनके मन पर लंबे समय तक रहेगा। महिलाओं पर दोहरी मार रानी और रश्मि, दोनों ही अब ऐसी स्थिति में हैं जहां उन्हें अपने बच्चों के साथ-साथ सामाजिक दबावों का भी सामना करना पड़ रहा है। एक ओर आर्थिक संकट है, दूसरी ओर परिवार के पुरुष सदस्यों के खत्म हो जाने से सुरक्षा और सहारे का अभाव। गांव की महिलाओं का कहना है कि ऐसी घटनाओं में अक्सर सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को उठाना पड़ता है। उन्हें न सिर्फ बच्चों की परवरिश करनी होती है, बल्कि समाज की नजरों और परिस्थितियों से भी जूझना पड़ता है। इस घटना ने पूरे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-बाड़ी के छोटे-छोटे विवाद अब खतरनाक रूप लेने लगे हैं। पहले जहां ऐसे मामलों को आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाता था, वहीं अब लोग सीधे हिंसा पर उतर आते हैं। ग्रामीणों ने बताया, पहले पंचायत में बैठकर फैसले होते थे, लेकिन अब गुस्सा और शराब मिलकर हालात बिगाड़ रहे हैं। गांव के युवाओं में भी इस घटना को लेकर चर्चा है कि आखिर ऐसे विवादों को कैसे रोका जाए। घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ी है। स्थानीय अधिकारियों ने गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है। लोगों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजना और महिलाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएं, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इस मामले में माशौगढ के क्षेत्राधिकारी अंबुज यादव ने बताया कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर पिता-पुत्र के खिलाफ हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है, साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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