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    Jammu and Kashmir का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर भड़के Farooq Abdullah, केंद्र को याद दिलाए वादे

    30 minutes ago

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    नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अबदुल्ला ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर सवाल उठाया और केंद्र से केंद्रशासित प्रदेश के लोगों से किए गए वादे पूरे करने का आग्रह किया। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों ने काफी इंतजार किया है। उनसे किए गए वादों को अब अमल में लाया जाना चाहिए।” उन्होंने संसद और उच्चतम न्यायालय में दिए गए आश्वासनों के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही ‘लगातार देरी’ पर सवाल उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2018 से 2024 के दौर ने साबित कर दिया कि नौकरशाही व्यवस्था कभी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार का स्थान नहीं ले सकती, जो लोगों की आकांक्षाओं, भावनाओं और रोजमर्रा की चिंताओं से गहराई से जुड़ी रहती है।अब्दुल्ला ने कहा, “नयी दिल्ली को जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना चाहिए और निर्वाचित सरकार को सभी अधिकार वापस देने चाहिए, ताकि शासन अधिक जवाबदेह, उत्तरदायी और जनकेंद्रित बन सके।इसे भी पढ़ें: Vat Savitri Vrat 2026: पति की लंबी आयु के लिए Vat Savitri Vrat 2026 पर करें यह खास Upay, जानें बरगद Puja का सही समय'नौकरशाही कभी निर्वाचित सरकार का विकल्प नहीं हो सकती'फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों के शासन मॉडल पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2018 से 2024 के बीच का दौर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि एक नौकरशाही व्यवस्था (Bureaucratic System) कभी भी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की जगह नहीं ले सकती।इसे भी पढ़ें: थकी-हारी, आंखों के नीचे चोट... Trial में हार के बाद Nikhat Zareen ने सिस्टम पर उठाए गंभीर सवालउनके संबोधन की मुख्य बातें:जनता से जुड़ाव की कमी: एक चुनी हुई सरकार लोगों की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी रोजमर्रा की दिक्कतों से गहराई से जुड़ी होती है, जो नौकरशाही में संभव नहीं है।अधिकारों की वापसी: शासन को अधिक जवाबदेह, उत्तरदायी और जनकेंद्रित बनाने के लिए निर्वाचित सरकार को उसके सभी अधिकार वापस सौंपे जाने चाहिए।गौरतलब है कि साल 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया था। इसके बाद से ही वहां की क्षेत्रीय पार्टियां पूर्ण राज्य का दर्जा वापस बहाल करने की मांग लगातार उठा रही हैं। फारूक अब्दुल्ला का यह बयान इसी संघर्ष की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  
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