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    Jan Gan Man: Mira Bhayander में हुआ Pahalgam जैसा Attack, Kalma नहीं पढ़ने पर दो हिंदू सुरक्षाकर्मियों पर Zaib Ansari ने धारदार हथियार से किया हमला

    3 hours from now

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    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल आतंकवादियों ने जिस तरह पर्यटकों की धर्म पूछ कर उनके द्वारा कलमा नहीं पढ़ पाने पर हत्या कर दी थी उसी तरह का मामला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा भायंदर इलाके से सामने आया है। बताया जा रहा है कि घटना 27 अप्रैल की सुबह लगभग चार बजे मीरा रोड के नया नगर इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत के पास हुई, जहां दो सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर तैनात थे। आरोपी की पहचान जैन जुबैर अंसारी के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग 31 वर्ष बताई जा रही है। वह पहले अमेरिका में करीब 19 वर्षों तक रह चुका है और वर्ष 2019 में भारत लौटा था। उसकी पत्नी अफगान मूल की बताई जाती है। घटना के समय उसने पहले सुरक्षा गार्डों से रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू की, लेकिन कुछ ही देर बाद वह वापस लौटा और उनसे उनका धर्म पूछने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसने गार्डों पर कलमा पढ़ने का दबाव डाला और तीन बार दोहराने को कहा।इसे भी पढ़ें: Jammu में Drug Peddlers के खिलाफ Bulldozer Action, Srinagar में आतंकवादियों के चार मददगार गिरफ्तार, आतंकी की संपत्ति कुर्कजब गार्डों ने ऐसा करने से इंकार किया, तो आरोपी ने अचानक तेज धार वाले हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो रमेश सेन नामक दोनों गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। राजकुमार मिश्रा की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है, जबकि सुब्रतो रमेश सेन का इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार पहले मिश्रा पर हमला किया गया और फिर पास में मौजूद सेन को भी निशाना बनाया गया।घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान की और महज नब्बे मिनट के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते को भी जांच में शामिल कर लिया गया है।जांच के दौरान आरोपी के घर से कई आपत्तिजनक और चिंताजनक सामग्री बरामद हुई है। इनमें एक तथाकथित तहरीर पत्र शामिल है, जिसमें एकल हमलावर हमले से जुड़ी जानकारी, खिलाफत स्थापित करने के तरीके और इस विषय में धार्मिक संदर्भ दिए गए हैं। इसके अलावा तीन धार्मिक नुस्खे और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं। इन दस्तावेजों में हमले को एक प्रारंभिक कदम के रूप में दर्शाया गया है, जिससे उसके इरादों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई की है और वह मीरा रोड में अकेला रह रहा था। वह ऑनलाइन माध्यम से रसायन विज्ञान की कोचिंग भी देता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से अकेलेपन में रह रहा था, जिससे उसके विचारों पर असर पड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां उसके डिजिटल उपकरणों की भी गहन जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका किसी बाहरी चरमपंथी संगठन या नेटवर्क से सीधा संपर्क था या नहीं। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि कहीं यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है या फिर वास्तव में एक अकेले व्यक्ति द्वारा अंजाम दिया गया हमला है। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां हर पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्प्रभावी किया जा सके। सूत्रों के अनुसार उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कुछ वीडियो और दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें उसने आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ने की इच्छा जाहिर की थी। यह पहलू जांच को और गंभीर बना देता है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वह धीरे-धीरे कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा था।उधर, इस घटना ने स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मीरा भायंदर जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। देखा जाये तो मीरा भायंदर की घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर वैचारिक चुनौती का संकेत भी है। जिस प्रकार आरोपी ने धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा को अंजाम देने की कोशिश की, वह स्पष्ट रूप से कट्टरपंथी सोच की उपज प्रतीत होती है। किसी भी धर्म का मूल संदेश मानवता, सहअस्तित्व और शांति होता है, लेकिन जब उसे विकृत विचारधाराओं के साथ जोड़ा जाता है, तो वह हिंसा का माध्यम बन सकता है।इस्लामिक चरमपंथ जैसी प्रवृत्तियां न केवल समाज में भय और अविश्वास पैदा करती हैं, बल्कि स्वयं उस धर्म की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। यह समझना आवश्यक है कि कट्टरपंथ किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि वह एक विकृत मानसिकता है, जिसे समय रहते पहचानकर रोकना जरूरी है।भारत एक लोकतांत्रिक और बहुलतावादी राष्ट्र है, जहां विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का यह सपना कि देश को इस्लामिक राष्ट्र में बदला जा सकता है, न केवल अव्यावहारिक है बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध है। भारत की ताकत उसकी विविधता और सहिष्णुता में है और यही उसकी स्थायी पहचान बनी रहेगी। इसलिए जरूरत इस बात की है कि समाज और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर कट्टरपंथ के हर रूप का दृढ़ता से मुकाबला करें।
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