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    झांसी-कानपुर ट्रैक पर वंदे भारत की स्पीड से दौडेंगी ट्रेनें:झांसी से गोविंदपुरी के बीच 110 से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की गई रफ्तार

    3 hours ago

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    झांसी-कानपुर-लखनऊ रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। अब झांसी से गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेनों की रफ्तार वंदे भारत और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के बराबर हो जाएगी। रेलवे द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इस रूट पर ट्रेनों की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। यह बदलाव यात्रियों के लिए समय की बड़ी बचत साबित होगा और झांसी से कानपुर-लखनऊ की यात्रा अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुगम हो जाएगी। मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने स्पीड बढ़ाने से पहले पूरे रेलखंड का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान ट्रैक की राइडिंग क्वालिटी को भी परखा गया, जिसके बाद इस रूट पर स्पीड बढ़ाने की मंजूरी दी गई। ट्रैक अपग्रेड के तहत यहां थिकवेब स्विच लगाए गए हैं, जिससे उच्च गति पर भी ट्रेनों का संचालन सुरक्षित तरीके से किया जा सके। झांसी मंडल में पहले से ही वंदे भारत एक्सप्रेस, शताब्दी, गतिमान, राजधानी और दूरंतो जैसी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो मुख्य रूप से दिल्ली रूट पर लागू होती है। हालांकि आगरा मंडल के बाद यही ट्रेनें 150 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेती हैं। वहीं, झांसी से लखनऊ को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर अब तक ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा ही थी, जिसके कारण यात्रियों को दिल्ली रूट के मुकाबले ज्यादा समय लगता था। अब स्पीड बढ़ने के बाद इस अंतर को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। गौरतलब है कि झांसी से गोविंदपुरी के बीच की दूरी लगभग 216 किलोमीटर है और अब इस पूरे सेक्शन पर 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ सकेंगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। थिकवेब स्विच से बढ़ी रफ्तार बता दें कि झांसी-कानपुर रेल ट्रैक पर ट्रेनों की स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचाने में थिकवेब स्विच का अहम रोल है। आसान भाषा में समझें तो थिकवेब स्विच पटरी का वह हिस्सा होता है, जिसे ट्रेन की लाइन बदलने वाली जगह पर लगाया जाता है, जिससे ट्रेन एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर डायवर्ट होती है। पहले यह हिस्सा अपेक्षाकृत पतला होता था, जिसके कारण ट्रेन को ट्रैक बदलते समय रफ्तार कम करनी पड़ती थी। लेकिन अब इसकी मोटाई बढ़ा दी गई है, जिससे ट्रेन बिना स्पीड घटाए भी सुरक्षित तरीके से ट्रैक बदल सकती है। यही वजह है कि इस तकनीकी बदलाव के बाद ट्रेनों की अधिकतम गति बढ़ाना संभव हो पाया है। अगले सप्ताह से बढ़ जाएगी रफ्तार दैनिक भास्कर से बातचीत में अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि झांसी मंडल में ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो बीना-धौलपुर सेक्शन पर लागू है। वहीं झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर अब तक यह स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिसे बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह रेलमार्ग अब वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के संचालन के लिए भी उपयुक्त हो गया है। आगामी एक सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई स्पीड के साथ ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। स्पीड बढ़ने के साथ टाइम टेबल में भी बदलाव होगा, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाता है।
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