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    झांसी में आशा वर्करों का प्रदर्शन:CMO ऑफिस से दीनदयाल सभागार तक नारेबाजी, बोलीं- एक कचौड़ी-दो समोसा, योगी का क्या भरोसा?

    1 hour ago

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    झांसी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से काम कर रहीं आशा वर्करों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में आशा वर्कर पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान उन्होंने "एक कचौड़ी, दो समोसा, योगी तेरा क्या भरोसा" के नारे लगाए। इसके बाद आशा वर्कर पंडित दीनदयाल सभागार पहुंच गईं। यहां उनका स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मिलने और अपनी मांगें रखने का कार्यक्रम था, लेकिन उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया। MLC और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष का घेराव सभागार में एमएलसी बाबूलाल तिवारी और भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप सरावगी पहुंचे। आशा वर्करों ने दोनों नेताओं को घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। आशा वर्करों ने कहा कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और अभियानों में फील्ड पर काम कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। 'कोरोना में वॉरियर्स कहा, अब मेहनताना भी नहीं' प्रदर्शन कर रहीं आशा वर्करों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना काम किया। उस समय सरकार और प्रशासन ने उन्हें कोरोना वॉरियर्स कहा था। मरीजों की सेवा से लेकर घर-घर सर्वे और स्वास्थ्य विभाग के अभियानों तक उनकी ड्यूटी लगाई गई। वर्करों का आरोप है कि इतना काम करने के बावजूद उन्हें उनके काम के अनुरूप उचित मेहनताना नहीं मिल रहा है। नियमितीकरण और समान वेतन की मांग आशा वर्करों ने लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि योग्यता, अनुभव और सेवा अवधि का लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि समान प्रकृति का काम करने वाले संविदा और नियमित कर्मचारियों के बीच वेतन की असमानता खत्म की जानी चाहिए। समय पर मानदेय देने की मांग आशा वर्करों ने वेतन और मानदेय से जुड़ी विसंगतियां दूर करने की भी मांग की। उनका कहना है कि कई बार भुगतान समय पर नहीं होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। उन्होंने हर महीने निर्धारित समय पर मानदेय और वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। आशा वर्करों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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