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    किडनी कांड का मास्टरमाइंड 30 लाख में ठेका लेता था:‘कमांडो सर्जरी’ कोडवर्ड से चलता नेटवर्क, कानपुर में होता था ट्रांसप्लांट

    16 hours ago

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    कानपुर किडनी कांड के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी ने पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रोहित ने बताया- वह 25 से 30 लाख रुपए में किडनी ट्रांसप्लांट का ठेका लेता था। डोनर और रिसिपिएंट की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी एजेंटों की होती थी। बातचीत के दौरान कोई उनकी बात समझ न सके, इसके लिए किडनी ट्रांसप्लांट का कोडवर्ड “कमांडो सर्जरी” रखा गया था। रोहित ने दिल्ली, मुंबई, कानपुर, प्रयागराज और मेरठ समेत देश के कई शहरों और राज्यों में अपने एजेंट फैला रखे थे। ये एजेंट अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के केस उसके पास लाते थे। इसके बाद रोहित तय करता था कि किस मरीज का ऑपरेशन कहां और किस अस्पताल में कराया जाएगा। पुलिस ने आरोपी रोहित से पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया। आखिर कैसे एक फैक्ट्री में नौकरी करने वाला रोहित किडनी गैंग का सरगना बन गया? रिपोर्ट में पढ़िए अब पढ़िए रोहित का कुबूलनामा… 12वीं पास रोहित बना किडनी ट्रांसप्लांट का सरगना डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया- रोहित तिवारी हरदोई के बिलग्राम गंगाधाम का रहने वाला है। इस समय वह गाजियाबाद के इंद्रापुरम स्थित न्यायखंड में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फ्लैट में रह रहा था। करोड़पति बनने के बाद उसने पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया और गर्लफ्रेंड के साथ लिव-इन में रहने लगा। 2008 में उसने हरदोई बिलग्राम के एसडी स्कूल से 12वीं पास की थी। वह 5 भाइयों और 2 बहनों में से एक है। बहनों की शादी हो चुकी है और पिता की मृत्यु हो चुकी है। इंटर के बाद वह बेरोजगार था। इसी दौरान गांव का अमित उसे गाजियाबाद ले गया। यहां उसने पॉली केबल बनाने वाली डिक्शन फैक्ट्री में मजदूरी शुरू की। इसके बाद उसने डेकी और फिर बारको कंपनी में काम किया। बारको में उसकी मुलाकात रिंकू नाम के युवक से हुई। रिंकू ने अपने जीजा से मुलाकात कराई। इसके बाद साल 2016 में उसे मेरठ भेज दिया गया। मधुकर क्लीनिक में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी करने लगा डीसीपी वेस्ट ने बताया- मेरठ पहुंचने के बाद उसकी मुलाकात किडनी गिरोह से जुड़े डेंटिस्ट डॉ. वैभव मुद्गल से हुई। इसके बाद वह डॉ. वैभव के मधुकर क्लीनिक में रिसेप्शनिस्ट का काम करने लगा। यहीं से उसका संपर्क मेरठ के अल्फा अस्पताल के मालिक डॉ. अमित से हुआ। 2018 में वह अल्फा अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी करने लगा। डॉ. अमित और डॉ. वैभव मुद्गल दोनों अल्फा अस्पताल के पार्टनर थे। इसी दौरान वह सीधे तौर पर किडनी रैकेट से जुड़ गया और दोनों के अवैध ट्रांसप्लांट के काम को संभालने लगा। रुपयों के लेन-देन को लेकर दोनों पार्टनरों में विवाद हो गया। इसके बाद रोहित डॉ. वैभव के साथ हो गया और उसे किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानपुर में नए अस्पताल तलाशने की जिम्मेदारी दी गई। साल 2019 में वह कानपुर पहुंचा और उसने देखा कि कल्याणपुर अवैध अस्पतालों का गढ़ है। यहां आसानी से किडनी ट्रांसप्लांट कराया जा सकता है। अहूजा हॉस्पिटल में 10 किडनी ट्रांसप्लांट हुए उन्होंने बताया- कानपुर में उसकी मुलाकात प्रयागराज के एजेंट नवीन पांडेय और शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काना से हुई। इसके बाद सभी ने कानपुर के अस्पतालों को ट्रांसप्लांट के लिए चुना। साल 2022 के बाद पहला ट्रांसप्लांट कल्याणपुर के आरोही हॉस्पिटल में किया गया। इसके बाद मेडिलाइफ हॉस्पिटल में 2 और फिर अहूजा हॉस्पिटल में 10 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कराए गए। किडनी ट्रांसप्लांट के 30 लाख रुपए लेता था पुलिस पूछताछ में रोहित ने बताया कि वह प्रति किडनी ट्रांसप्लांट 25 से 30 लाख रुपए लेता था। उसके पास ट्रांसप्लांट करने की पूरी टीम मौजूद रहती थी। डील फाइनल होने के बाद टीम मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन करती थी। यह रकम केवल ट्रांसप्लांट के लिए ली जाती थी। इसके अलावा ऊपर की राशि में एजेंट का कमीशन, अस्पताल का खर्च और अन्य व्यवस्थाएं शामिल होती थीं। एजेंट किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसिपिएंट की तलाश कर उनसे डील फाइनल करते थे। रोहित का एजेंट की डील से सीधा संबंध नहीं होता था। टेलीग्राम से डोनर ढूंढता था पारुल केस के बाद गोवा में जश्न मनाया ‘कमांडो सर्जरी’ कोडवर्ड यूज करते थे डीसीपी ने बताया- अब तक गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपियों के मोबाइल की जांच के दौरान सामने आया कि व्हाट्सएप मैसेज में किडनी कांड के लिए ‘कमांडो सर्जरी’ कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। शुरुआत में पुलिस इसे समझ नहीं सकी, लेकिन पूछताछ में रोहित ने बताया कि सभी एजेंट और किडनी रैकेट से जुड़े लोग किडनी ट्रांसप्लांट को ‘कमांडो सर्जरी’ कहकर कोडवर्ड में बातचीत करते थे, ताकि किसी को यह समझ न आए। एनेस्थीसिया राजेश-कुलदीप देते, अली करता था ट्रांसप्लांट पुलिस ने रोहित से पूछा कि ऑपरेशन कौन करता है, एनेस्थीसिया कौन देता है और कितने लोग इसमें शामिल होते हैं। इस पर रोहित ने बताया कि एनेस्थीसिया देने का काम जेल भेजे जा चुके ओटी मैनेजर राजेश और कुलदीप करते थे। इसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली करता था। ओटी में अफजल और वैभव भी मौजूद रहते थे। इन्हीं 5 से 6 लोगों की टीम ऑपरेशन थिएटर में रहती और ट्रांसप्लांट करने के बाद निकल जाती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि डॉ. अली ने दिल्ली के एक बड़े अस्पताल से ट्रेनिंग ली थी। पत्नी को छोड़ गर्लफ्रेंड के साथ रहता था डीसीपी ने बताया कि रोहित तक पहुंचने में उसकी गर्लफ्रेंड की अहम भूमिका रही। फरारी के दौरान उसने अपने दोनों मोबाइल बैराज से गंगा में फेंक दिए थे। पुलिस ने नंबरों की जांच की तो उसके मोबाइल पर कोई नियमित कॉल नहीं मिली। फरारी के दौरान वह अलग-अलग नंबरों से अपनी गर्लफ्रेंड को फोन करता था। इन्हीं नंबरों को ट्रेस करते हुए पुलिस उस तक पहुंची। अरेबिका केस और पंजाब के मरीज का मामला पूछताछ में रोहित ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका की अरेबिका को प्रयागराज का एजेंट नवीन पांडेय लेकर आया था। उसने सीधे कोई डील नहीं की थी और एजेंट के माध्यम से ही पूरा काम हुआ। इस ऑपरेशन में उसे 20 लाख रुपए मिले थे। मेडिलाइफ अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक महिला की हालत बिगड़ने और बाद में दिल्ली के अस्पताल में मौत होने की बात सामने आई थी। हालांकि, रोहित इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सका। अमृतसर के मरीज के बारे में रोहित ने बताया कि उसे गोपाल नाम का एजेंट लेकर आया था। गोपाल ने रोहित से संपर्क किया, लेकिन डोनर न होने के कारण उसने मना कर दिया। इसके बाद गोपाल पैसा लेकर फरार हो गया। अब पांच की तलाश में छापेमारी डीसीपी ने बताया कि पुलिस टीम किडनी स्कैंडल में शामिल मेरठ के डॉ. वैभव, डॉ. अमित, अफजल, डॉ. अली और प्रयागराज के एजेंट नवीन पांडेय की तलाश में जुटी है। अलग-अलग टीमें छापेमारी कर रही हैं। रोहित से विस्तृत पूछताछ के लिए उसे रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। रिमांड के दौरान उससे दोबारा पूछताछ की जाएगी, क्योंकि शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को काफी उलझाया, लेकिन शिवम उर्फ काना की चैट समेत अन्य साक्ष्यों के चलते वह तथ्यों से इनकार नहीं कर सका। ----------- ये भी पढ़ें- नोएडा में बिना लीडर कैसे भड़के फैक्ट्री कर्मचारी: प्रशासन की बात श्रमिकों तक नहीं पहुंची, मांगें न मानने की अफवाह से हिंसक हुए यूपी के नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले 3 दिन से फैक्ट्री कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया। आंदोलन कर रहे सैकड़ों कर्मचारी हाथ में डंडे-लाठी लेकर सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में 350 से ज्यादा फैक्ट्रियों में पथराव और तोड़फोड़ की। 150 से ज्यादा गाड़ियां तोड़ीं। 50 से ज्यादा फूंक दीं। पुलिस की गाड़ियां पलट दीं। पुलिसवालों पर पथराव किया। 30 लोग चोटिल हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
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